सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दृष्टिकोण- पार्ट 3

Disclaimer यह एक series की पहली कहानी का आखिरी Part है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता है तथा हर कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।                             बलाॉगरस् मेरा नाम ज़रूरी नही है, क्योंकि यह कहानी मेरी नही है। बस इतना जान लीजिए कि मैं एक प्राइवेट यूनीवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ, कम्यूनीकेशन पढ़ाता हूँ। मैं हर बार बच्चो को एक ब्लॉग मेन्टेन करने के लिए कहता हूँ, बनवा भी देता हूँ पर लिखता कोई नही वो बात अलग है। पिछले साल जो सेशन शुरू हुआ उसमें भी मैंने बच्चो से यही कहा था, हालाँकि मुझे पता था इस्तेमाल कोई नही करने वाला। इस बार मगर चमत्कार हो गया, पहली बार कुछ बच्चो ने ब्लॉग लिखा। एक शाम ब्लाॉग की लिस्ट पर मेरी नज़र पड़ी तो सोचा देखता हूँ खोलकर, शुरूआत में तो कुछ नही था पर बाद में एक ब्लाग मिला 'माई_व्यू' नाम का उसमें कुछ शायरियाँ लिखी थी। मुझे यह देखकर काफी खुशी हुई कि किसी ने कुछ तो लिखा, उसके बाद दो और थे जिनमें कुछ लिखा था पर कुछ खास नही। फिर एक ब्लॉग 'आई_एम_लिमिटलेस' नाम का मिला, उ...

दृष्टिकोण - पार्ट 2

Disclaimer यह एक series की पहली कहानी का दूसरा Part है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता है तथा हर कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।                                वीर_द_डूड क्लास में लगभग हर लड़की मुझसे बात करना चाहती है, पर वो नही करती जिससे मैं करना चाहता हूँ, पता नही क्यों। पहले सेमेस्टर के आखिर की बात है तब से मैं उसे पसन्द करता हूँ और अब चौथा सेमेस्टर आ गया है। उसका नाम सीमा है, और शायद वो मेरी सीमा से बाहर है, हाहा, सॉरी बैड जोक। खैर इस बीच मेरी कई लड़कियों से बात हुई, जिससे बात करो वो जाने क्या समझती है प्रपोज़ कर देती है यहाँ तक की सीमा की फ्रेंड नेहा ने भी यही किया। ऐसा नही है कि यह लड़कियाँ अच्छी नही हैं, पर पता नही क्यों मुझे बहुत ज़्यादा अजीब सा महसूस होने लगता है। सच कहूँ तो एक अजीब सा डर लगता है, डर किस बात का मुझे नही पता। शायद इस बात का कि इनके साथ हो गया तो सीमा से बात कैसे करूँगा, या शायद इस बात का कि मेरी आज़ादी छिन जाएगी। कई लड़कियों ने चैट में कहा तो मैंने वहाँ उन...

दृष्टिकोण - पार्ट 1

Disclaimer यह एक series की पहली कहानी का पहला Part है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता है तथा हर कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।                           आई_एम_लिमिटलेस        "वो प्लेबॉय है, उसके चक्कर में ना पड़ना।" नेहा ने मुझको समझाते हुए कहा। "तुझे पता भी है वो कैसा है, उसे सिर्फ लड़कियों से चिकनी-चुपड़ी बाते करना आता है, और तू ठहरी संजीदा किस्म की।" "अरे मैं तो बस यह कह रही थी कि मुझे तो वो सही लगता है", मैं बोली। यही बातें चल रही थी कि तब ही वीर वहाँ आ गया और हम लोग चुप हो गए। रीसेस खत्म होने वाला था, इस समय तो वीर को अपने दोस्तो के साथ होना चाहिए था तो यह यहाँ क्या कर रहा है,  हम दोनो ने एक-दूसरे से आँखो-आँखो में पूछा। वीर ने अचानक बात करना शुरू कर दी। नेहा को वो बिल्कुल अच्छा नही लगता था पर मुझे वो बहुत पसन्द था और एक अच्छा इन्सान लगता था इसलिए मैं यह समझ नही पा रही थी कि इतना नेक दिल लगने वाला इन्सान प्लेबॉय कैसे हो सकता है। रीसेस खत्म हुआ और मैं कॉलेज पू...