कई बार ऐसा होता है कि हमारे दिल में कोई बात होती है पर हमारे समझ नही आता कि उसे बयाँ कैसे करें फिर एक दिन अचानक लोग उस बारे में बात करने लगते हैं तो आप भी comfortable होकर वो बात कर पाते हैं। सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या करने के बाद सब Depression के बारे में बात कर रहे हैं तो मैने सोचा यही सही वक्त है अपना अनुभव लोगो तक पहुँचाने का। यह लिखने का idea मुझे शाहीन भट्ट की किताब 'I have never been Unhappier' से आया जो आजकल मैं पढ़ रहा हूँ। बहुत ही अच्छी किताब है।
यहाँ मैं पूरे तरीके से अपना Experience लिखने वाला हूँ, बाकी लोगो का depression इसके जैसा या इससे बहुत अलग भी हो सकता है, सबको एक ना समझे, और एक खास बात यह कि depression हमेशा किसी बुरी घटना की वजह से नही कभी-कभी Hormonal Changes से भी होता है।
मैं एक Joint Family में रहता हूँ और मैं घर में सबसे छोटा था तो आप समझ सकते हैं मुझे कितना लाड़-प्यार मिला होगा, मुझे किसी चीज़ की कमी नही थी, मैं बहुत ही हँसमुख बच्चा था। 2010 के सितम्बर तक ऐसा ही रहा फिर अक्टूबर में मेरी माँ यह दुनिया छोड़ कर चली गईं। मैं यह सबसे पहले इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि मेरे depression की शुरूआत वहीं से हुई थी। अम्मी के जाने के बाद सब बदल गया, हर बच्चे की तरह मैं भी अपनी अम्मी के बहुत करीब था, उनसे हर बात करता था पर अब जब वो चली गईं हैं तो यह बात मैं किससे कहूँ, कोई दोस्त भी नही था उस वक्त मेरा, पापा से कह नही सकते थे, पता नही क्यों। छुप-छुप कर रोते अकेले में और सबके सामने Normal रहते, पर मिज़ाज में बदलाव आना शुरू हो गए थे, जो लोग मुझे सही लगते थे उनमे भी बुराईयाँ दिखने लगी। कोई अम्मी की मौत पर दुख भी जताता तो लगता कि ताना मार रहा है। एक महीने बाद जब School गए तो पापा ने Principal को बताया कि ऐसा-ऐसा हुआ था तो वो बोली, "तो अब क्या है, एक महीना तो हो चुका है।" यह सुनकर मुझे उन पर बहुत गुस्सा आया।
8 महीने बाद दादी ने पापा की दूसरी शादी करा दी, इससे मुझे ऐसा लगा कि पापा भी हमे छोड़ गए, वो होते हुए भी अब नही हैं, नई माँ को मैं Accept नही कर पा रहा था। एक दिन तो ऐसा आया कि नदी में कूदने के लिए निकल गया पर रास्ते में Cousin मिल गए और वो वापस ले आए। घर आकर होश आया कि यह मैं क्या करने जा रहा था। धीरे-धीरे चीज़े सुधरी तो समझ आया कि मैं बहुत Selfish हो रहा था, पापा के लिए तो कभी सोचा ही नही और यहाँ से इस मामले में सब सही हो गया।
इस दौरान मुझको प्यार हो चुका था, इस प्यार से मुझे बहुत उम्मीद थी, लगा था कि सब ठीक हो जाएगा क्योंकि प्यार के बारे में हमेशा अच्छा ही सुना था लेकिन मुझे नही पता था कि यह तो सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाला है। 2013-14 के आस-पास मुझे अहसास हुआ कि यह मेरा प्यार एकतरफा है, और जब मुझे यह समझ आया तो सबसे पहला ख्याल यही आया कि ऊपर वाला क्या करना चाहता है मेरे साथ। पहले तो अम्मी को छीन लिया और अब यह शख्स भी मेरा नही होने वाला तो फिर मेरी किस्मत में है क्या?
इस सबके अलावा काफी कुछ ऐसा हुआ जो मैं यहाँ लिख भी नही सकता, बस यह समझ लो कि मेरा दिमाग़ खराब हो चुका था, लोगो की हर छोटी बात बुरी लगने लगी, लोगो से नाराज़ होना मेरी आदत बन गया। 2014 में College शुरू हुआ, नए लोग मिले, वो वक्त ऐसा था कि पार्टी में बुरी तरह नाचता था और Hostel में आकर अजीब ओ गरीब गाने सुनता और उदास बैठा रहता था। पता नही मैं Introvert था यह इस Depression ने मुझे बना दिया, वहाँ मैने अपने Classmates और Roommate के अलावा किसी से बात तक नही की। हर Weekend पर मैं घर चला जाता था, College में सबसे घिरे रहने से बेहतर मुझे Station पर अकेले बैठे रहना लगता था। मुझे यहाँ तक समझ नही आया था कि मुझे क्या हो गया था। खैर College ऐसे ही गुज़र गया। रोना तो आम हो गया था, हर छोटी बात पर रोना आने लगता था पर मैं कहाँ जानता था कि हालात सिर्फ बिगड़ते ही जाना है सुधरना नही हैं। 2018-19 के करीब वो वक्त आ गया कि मैं लोगो को छोड़ कर खुद को हर चीज़ के लिए ब्लेम करने लगा, वो चीज़ मेरे हाथ में है या नही इससे मतलब नही, बस "मैं हूँ ही worthless और useless मुझसे कुछ नही हो सकता।" एक बार बड़े पापा ने नमाज़ में कुछ मामूली सी ग़लती बताई तो मैं यह सोचकर बहुत रोया कि एक नमाज़ ही तो कुछ अच्छा है जो मैं करता हूँ वो भी मुझसे नही होगा तो मैं क्या करूँगा, मेरी नमाज़े भी अल्लाह कुबूल नही करेगा तो क्या होगा। अब यह वो वक्त था जब रोने के लिए किसी वजह की भी ज़रूरत नही थी, बेवजह ही रोना आता रहता था। मुझमे बहुत कमियाँ हैं जिनके लिए मैने बचपन से ही सुना है जैसे चश्मिश होना या दुबला होना और Sport ना खेलना यह सब कुछ, मैने कभी इसका बुरा नही माना, जो है सो है पर अब मैं इतना Depress हूँ कि एक बार एक लड़के ने कहा, "मर्दो को इतना पतला नही होना चाहिए।" तो मैं बेसाख्ता रोया, बल्कि अपने दुबलेपन पर तो मैने हमेशा से सुना है फिर भी। E-Rickshaw में आ रहा था बहुत Control किया पर नही हुआ, रो पड़े, शायद Driver ने भी Notice किया था। जब रोने के लिए कुछ नही बचता तो वो बुरी चीज़े जो हुईं भी नही है उनको Imagine करके रोने लगता, कि अगर हो गईं तो कैसा लगेगा, यह सुनने में बिलकुल ऐसा लग रहा है ना जैसे मुझे शौक है रोने का पर क्या आप मेरा विश्वास करेंगे कि यह मेरा दिमाग़ अपने आप करने लगता है।
ऐसा नही है कि मैं बस रोता रहता हूँ कुछ दिन ऐसे होते हैं जब मूड बेवजह बहुत अच्छा होता है और मैं खूब हँसता और मज़े करता हूँ पर अजीब बात है ना कि आप बिना वजह रोयें या Sad हों तो लोग उसे Problem समझते हैं पर बिना वजह हँसने और खुश रहने को Normal समझते हैं।
Depression में लोगो से बात करनी चाहिए, और बात करने के लिए दोस्तो से बेहतर कौन है, मगर मैं नही कर पाता, दरअसल कुछ भी कहना इतना आसान है ही नही, और पहली बात किसी के पास इतना वक्त नही है कि मुझे सुकून से सुन सके। वो चाहते हैं मैं 10-15 मिनट में सब बता दूँ पर इतना वक्त तो मुझे यह सोचने में लग जाता है कि शुरू कहाँ से करूँ। मैं शेर-ओ-शायरी भी लिखता हूँ एक बार एक दोस्त ने उसे भी बकवास बोल दिया, हो सकता है उसने मज़ाक में बोला हो और हाँ माना मैं कोई अच्छा लेखक नही हूँ पर वो सब मेरे दिल की आवाज़ थी अब जिस दोस्त को यह ना समझ आए उसे मैं और क्या बता पाऊँगा। जिन लोगो ने थोड़ा बहुत सुना भी उनका Response ऐसा था कि बंदा और ज़्यादा Depress हो जाए, जैसे उनका यह कह देना कि यह तो सबके साथ होता है या इसमे कौन सी बड़ी बात है।Directly नही तो Indirectly यह कह देना कि यह कुछ भी नही है दुनिया में इससे कहीं ज़्यादा ग़म है। सबसे बड़ी Problem तो यह है कि कुछ लोगो को लगता है जो उन्हे Feel नही हो रहा वो Exist ही नही करता, और Depression का तो Concept ही किसी को नही पता तो उनकी भी ग़लती नही है। हाँ बस गलती यह है कि सामने वाले की बात का विश्वास ही नही करते, यह नही सोचते कि शायद यह सही कह रहा हो चलो रुक कर पूरी बात सुनते हैं।
2020 आ गया है, हालात तो यही हैं, साईकिल से चलते वक्त जब Truck सामने आता है तो सोचते हैं अगर इसके सामने से ना हटे तो क्या होगा। ऊचाई पर खड़े होकर सोचते हैं कि अगर यहाँ से कूद जाएँ तो बचेंगे या मर जाएँगे। इस तरह के अलग-अलग ख्याल आते हैं पर इसका मतलब यह नही है कि मुझे Suicide करनी है बस यह लगता है अब तक मर जाते तो सही रहता। शाहीन भट्ट ने भी अपनी किताब में ऐसा ही कुछ लिखा है जिसे पढ़ कर मुझे बहुत खुशी हुई कि चलो मैं अकेला नही हूँ ऐसा फील करने वाला। पर हाँ अब मैने खुद को थोड़ा बहुत समझ लिया है और खुद की Help कर रहा हूँ, लोगो से तो उम्मीद छोड़ ही दी है, I hope one day everything is gonna be better.
मैने यह 2010 से 2020 तक का लिखा है, तो आप समझ सकते हैं कि चन्द Paragraphs में यह 10 साल की Outline भी नही खिची है, बस एक Idea देना था कि Depression कैसा है, ताकि आप किसी अपने की मदद कर पाएँ, और हाँ अगर आप यह सोच रहे हैं कि इतना सब है तो मेरे घर वालो को कुछ खबर नही है क्या, नही उन्हे खबर नही है क्योंकि मैं किसी के सामने नही रोता और दूसरी बात मैं खाना कभी नही छोड़ता, Depression का मेरे खाने पर कोई फर्क नही पड़ा है, और यहाँ जब आप खाना ना खाएँ तब ही लोगो को लगता है कि कुछ हुआ है।
यहाँ मैं पूरे तरीके से अपना Experience लिखने वाला हूँ, बाकी लोगो का depression इसके जैसा या इससे बहुत अलग भी हो सकता है, सबको एक ना समझे, और एक खास बात यह कि depression हमेशा किसी बुरी घटना की वजह से नही कभी-कभी Hormonal Changes से भी होता है।
मैं एक Joint Family में रहता हूँ और मैं घर में सबसे छोटा था तो आप समझ सकते हैं मुझे कितना लाड़-प्यार मिला होगा, मुझे किसी चीज़ की कमी नही थी, मैं बहुत ही हँसमुख बच्चा था। 2010 के सितम्बर तक ऐसा ही रहा फिर अक्टूबर में मेरी माँ यह दुनिया छोड़ कर चली गईं। मैं यह सबसे पहले इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि मेरे depression की शुरूआत वहीं से हुई थी। अम्मी के जाने के बाद सब बदल गया, हर बच्चे की तरह मैं भी अपनी अम्मी के बहुत करीब था, उनसे हर बात करता था पर अब जब वो चली गईं हैं तो यह बात मैं किससे कहूँ, कोई दोस्त भी नही था उस वक्त मेरा, पापा से कह नही सकते थे, पता नही क्यों। छुप-छुप कर रोते अकेले में और सबके सामने Normal रहते, पर मिज़ाज में बदलाव आना शुरू हो गए थे, जो लोग मुझे सही लगते थे उनमे भी बुराईयाँ दिखने लगी। कोई अम्मी की मौत पर दुख भी जताता तो लगता कि ताना मार रहा है। एक महीने बाद जब School गए तो पापा ने Principal को बताया कि ऐसा-ऐसा हुआ था तो वो बोली, "तो अब क्या है, एक महीना तो हो चुका है।" यह सुनकर मुझे उन पर बहुत गुस्सा आया।
8 महीने बाद दादी ने पापा की दूसरी शादी करा दी, इससे मुझे ऐसा लगा कि पापा भी हमे छोड़ गए, वो होते हुए भी अब नही हैं, नई माँ को मैं Accept नही कर पा रहा था। एक दिन तो ऐसा आया कि नदी में कूदने के लिए निकल गया पर रास्ते में Cousin मिल गए और वो वापस ले आए। घर आकर होश आया कि यह मैं क्या करने जा रहा था। धीरे-धीरे चीज़े सुधरी तो समझ आया कि मैं बहुत Selfish हो रहा था, पापा के लिए तो कभी सोचा ही नही और यहाँ से इस मामले में सब सही हो गया।
इस दौरान मुझको प्यार हो चुका था, इस प्यार से मुझे बहुत उम्मीद थी, लगा था कि सब ठीक हो जाएगा क्योंकि प्यार के बारे में हमेशा अच्छा ही सुना था लेकिन मुझे नही पता था कि यह तो सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाला है। 2013-14 के आस-पास मुझे अहसास हुआ कि यह मेरा प्यार एकतरफा है, और जब मुझे यह समझ आया तो सबसे पहला ख्याल यही आया कि ऊपर वाला क्या करना चाहता है मेरे साथ। पहले तो अम्मी को छीन लिया और अब यह शख्स भी मेरा नही होने वाला तो फिर मेरी किस्मत में है क्या?
इस सबके अलावा काफी कुछ ऐसा हुआ जो मैं यहाँ लिख भी नही सकता, बस यह समझ लो कि मेरा दिमाग़ खराब हो चुका था, लोगो की हर छोटी बात बुरी लगने लगी, लोगो से नाराज़ होना मेरी आदत बन गया। 2014 में College शुरू हुआ, नए लोग मिले, वो वक्त ऐसा था कि पार्टी में बुरी तरह नाचता था और Hostel में आकर अजीब ओ गरीब गाने सुनता और उदास बैठा रहता था। पता नही मैं Introvert था यह इस Depression ने मुझे बना दिया, वहाँ मैने अपने Classmates और Roommate के अलावा किसी से बात तक नही की। हर Weekend पर मैं घर चला जाता था, College में सबसे घिरे रहने से बेहतर मुझे Station पर अकेले बैठे रहना लगता था। मुझे यहाँ तक समझ नही आया था कि मुझे क्या हो गया था। खैर College ऐसे ही गुज़र गया। रोना तो आम हो गया था, हर छोटी बात पर रोना आने लगता था पर मैं कहाँ जानता था कि हालात सिर्फ बिगड़ते ही जाना है सुधरना नही हैं। 2018-19 के करीब वो वक्त आ गया कि मैं लोगो को छोड़ कर खुद को हर चीज़ के लिए ब्लेम करने लगा, वो चीज़ मेरे हाथ में है या नही इससे मतलब नही, बस "मैं हूँ ही worthless और useless मुझसे कुछ नही हो सकता।" एक बार बड़े पापा ने नमाज़ में कुछ मामूली सी ग़लती बताई तो मैं यह सोचकर बहुत रोया कि एक नमाज़ ही तो कुछ अच्छा है जो मैं करता हूँ वो भी मुझसे नही होगा तो मैं क्या करूँगा, मेरी नमाज़े भी अल्लाह कुबूल नही करेगा तो क्या होगा। अब यह वो वक्त था जब रोने के लिए किसी वजह की भी ज़रूरत नही थी, बेवजह ही रोना आता रहता था। मुझमे बहुत कमियाँ हैं जिनके लिए मैने बचपन से ही सुना है जैसे चश्मिश होना या दुबला होना और Sport ना खेलना यह सब कुछ, मैने कभी इसका बुरा नही माना, जो है सो है पर अब मैं इतना Depress हूँ कि एक बार एक लड़के ने कहा, "मर्दो को इतना पतला नही होना चाहिए।" तो मैं बेसाख्ता रोया, बल्कि अपने दुबलेपन पर तो मैने हमेशा से सुना है फिर भी। E-Rickshaw में आ रहा था बहुत Control किया पर नही हुआ, रो पड़े, शायद Driver ने भी Notice किया था। जब रोने के लिए कुछ नही बचता तो वो बुरी चीज़े जो हुईं भी नही है उनको Imagine करके रोने लगता, कि अगर हो गईं तो कैसा लगेगा, यह सुनने में बिलकुल ऐसा लग रहा है ना जैसे मुझे शौक है रोने का पर क्या आप मेरा विश्वास करेंगे कि यह मेरा दिमाग़ अपने आप करने लगता है।
ऐसा नही है कि मैं बस रोता रहता हूँ कुछ दिन ऐसे होते हैं जब मूड बेवजह बहुत अच्छा होता है और मैं खूब हँसता और मज़े करता हूँ पर अजीब बात है ना कि आप बिना वजह रोयें या Sad हों तो लोग उसे Problem समझते हैं पर बिना वजह हँसने और खुश रहने को Normal समझते हैं।
Depression में लोगो से बात करनी चाहिए, और बात करने के लिए दोस्तो से बेहतर कौन है, मगर मैं नही कर पाता, दरअसल कुछ भी कहना इतना आसान है ही नही, और पहली बात किसी के पास इतना वक्त नही है कि मुझे सुकून से सुन सके। वो चाहते हैं मैं 10-15 मिनट में सब बता दूँ पर इतना वक्त तो मुझे यह सोचने में लग जाता है कि शुरू कहाँ से करूँ। मैं शेर-ओ-शायरी भी लिखता हूँ एक बार एक दोस्त ने उसे भी बकवास बोल दिया, हो सकता है उसने मज़ाक में बोला हो और हाँ माना मैं कोई अच्छा लेखक नही हूँ पर वो सब मेरे दिल की आवाज़ थी अब जिस दोस्त को यह ना समझ आए उसे मैं और क्या बता पाऊँगा। जिन लोगो ने थोड़ा बहुत सुना भी उनका Response ऐसा था कि बंदा और ज़्यादा Depress हो जाए, जैसे उनका यह कह देना कि यह तो सबके साथ होता है या इसमे कौन सी बड़ी बात है।Directly नही तो Indirectly यह कह देना कि यह कुछ भी नही है दुनिया में इससे कहीं ज़्यादा ग़म है। सबसे बड़ी Problem तो यह है कि कुछ लोगो को लगता है जो उन्हे Feel नही हो रहा वो Exist ही नही करता, और Depression का तो Concept ही किसी को नही पता तो उनकी भी ग़लती नही है। हाँ बस गलती यह है कि सामने वाले की बात का विश्वास ही नही करते, यह नही सोचते कि शायद यह सही कह रहा हो चलो रुक कर पूरी बात सुनते हैं।
2020 आ गया है, हालात तो यही हैं, साईकिल से चलते वक्त जब Truck सामने आता है तो सोचते हैं अगर इसके सामने से ना हटे तो क्या होगा। ऊचाई पर खड़े होकर सोचते हैं कि अगर यहाँ से कूद जाएँ तो बचेंगे या मर जाएँगे। इस तरह के अलग-अलग ख्याल आते हैं पर इसका मतलब यह नही है कि मुझे Suicide करनी है बस यह लगता है अब तक मर जाते तो सही रहता। शाहीन भट्ट ने भी अपनी किताब में ऐसा ही कुछ लिखा है जिसे पढ़ कर मुझे बहुत खुशी हुई कि चलो मैं अकेला नही हूँ ऐसा फील करने वाला। पर हाँ अब मैने खुद को थोड़ा बहुत समझ लिया है और खुद की Help कर रहा हूँ, लोगो से तो उम्मीद छोड़ ही दी है, I hope one day everything is gonna be better.
मैने यह 2010 से 2020 तक का लिखा है, तो आप समझ सकते हैं कि चन्द Paragraphs में यह 10 साल की Outline भी नही खिची है, बस एक Idea देना था कि Depression कैसा है, ताकि आप किसी अपने की मदद कर पाएँ, और हाँ अगर आप यह सोच रहे हैं कि इतना सब है तो मेरे घर वालो को कुछ खबर नही है क्या, नही उन्हे खबर नही है क्योंकि मैं किसी के सामने नही रोता और दूसरी बात मैं खाना कभी नही छोड़ता, Depression का मेरे खाने पर कोई फर्क नही पड़ा है, और यहाँ जब आप खाना ना खाएँ तब ही लोगो को लगता है कि कुछ हुआ है।
अब इतना पढ़ लिया है तो कुछ Advice भी लेलो ---
कोई ज़्यादा Sad हो तो उसकी Root cause को जानने की कोशिश करो।
किसी से यह ना कहो कि तुम Sad ही रहना चाहते हो, Believe me यार ऐसे कोई नही रहना चाहता, यह कोई अच्छी feeling नही है।
अगर किसी को दोस्त मानते हो, उसकी फिक्र करते हो तो उसे बात करने का और खुलने का मौका दो, यह बाते कहने में समय लगता है।
किसी की परेशानी को छोटा ना कहो, क्योंकि आपको नही पता कि जो काँटा ऊपर से ज़रा सा दिख रहा है वो Skin के कितना अन्दर तक धंसा हुआ है।
अगर सुन ही रहे हो तो किसी से Compare ना करो, यह ना कहो कि "Its not a big deal, it happens with many people." जैसे एक बार मैंने एक दोस्त को बताया कि मेरी भतीजी मरी हुई पैदा हुई तो उसने कहा, "कोई बात नही है दोबारा ठीक होगा।" मैने माना दुनिया में यह हज़ारो-लाखो बार हुआ होगा पर मेरे घर में तो पहली बार हुअा है, मुझे तो दुख उतना ही होगा जितना पहली बार किसी शख्स के साथ होने पर उसे हुआ होगा।
किसी से यह ना कहो कि तुम Sad ही रहना चाहते हो, Believe me यार ऐसे कोई नही रहना चाहता, यह कोई अच्छी feeling नही है।
अगर किसी को दोस्त मानते हो, उसकी फिक्र करते हो तो उसे बात करने का और खुलने का मौका दो, यह बाते कहने में समय लगता है।
किसी की परेशानी को छोटा ना कहो, क्योंकि आपको नही पता कि जो काँटा ऊपर से ज़रा सा दिख रहा है वो Skin के कितना अन्दर तक धंसा हुआ है।
अगर सुन ही रहे हो तो किसी से Compare ना करो, यह ना कहो कि "Its not a big deal, it happens with many people." जैसे एक बार मैंने एक दोस्त को बताया कि मेरी भतीजी मरी हुई पैदा हुई तो उसने कहा, "कोई बात नही है दोबारा ठीक होगा।" मैने माना दुनिया में यह हज़ारो-लाखो बार हुआ होगा पर मेरे घर में तो पहली बार हुअा है, मुझे तो दुख उतना ही होगा जितना पहली बार किसी शख्स के साथ होने पर उसे हुआ होगा।
One needs courage to accept and write these things. You've done it. Short, but effective. A great step. Proud to be a friend of yours. Hope it would bring some change.
जवाब देंहटाएंThank you so much Man.
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