Disclaimer यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। रात के 9 बज रहे थे, वो अपने कमरे में बेचैनी से इधर-उधर टहलते हुए लगातार किसी को फोन लगा रहा था। शायद किसी ने फोन उठाया नहीं इसलिए उसने मोबाईल को गुस्से में बेड पर पटक दिया। मोबाईल गिर के अभी एक जगह पर रुक भी नहीं पाया था कि उसने फिर से उसे उठाया और किसी को मैसेज किया। मैसेज करके मोबाईल को हथेली पर मारने लगा, मानो ऐसा करने से उसमें से रिप्लाई निकल आएगा। फिर वो अचानक से रुका और मोबाईल को जींस की जेब में रखकर भागा जैसे कुछ याद आ गया हो। बाहर जाकर बाइक पर बैठा और सीधे एक रेस्टॉरेंट पहुँचा। रेस्टॉरेंट के अंदर जाकर उसने एक आदमी से पूछा, "क्या मैं यहाँ के मालिक से बात कर सकता हूँ?" '"मैं ही यहाँ का मालिक हूँ, बताइये?" "वो दरअसल..." उसने अपनी बात पूरी करने से पहले एक मेज़ पर से मेनू उठाया और उसके आखिरी पेज पर बिलकुल नीचे उंगली रखी जहाँ काफी छोटे फॉन्ट में एक लाइन लिखी थी, "अगर आपके टूटे दिल का हाल सुनने वाला कोई नहीं है तो, इस्तक़बाल!" "इसका क्या मतलब है?" "आपको क्या लगता है?" "मुझे ल...
Disclaimer यह एक Series की आठवीं (आखिरी) कहानी है, इसको समझने के लिए आपको कम से कम साँतवी कहानी (नकारात्मक) पढ़नी पड़ेगी। यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। एक दिन एक शिराज़ नाम का Angel God के पास आया और बोला, "मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ" "पूछो" "आपने यह जो इंसानो की दुनिया बनाई है, इसमे जो कुछ भी होता है सब आपने ही लिखा है, वो जो भी करते हैं अच्छा हो या बुरा सब आपकी मर्ज़ी से होता है।" "हाँ तो?" "तो क्या आप मुझे इजाज़त दे सकते हैं कि मैं भी कुछ लोगो की कहानी लिखूँ?" "तुम क्यों लिखना चाहते हो?" "बस मैं देखना चाहता हूँ कि मैं कैसी कहानी लिखूँगा और वो आपको पसंद आयेगी या नही। मैं कुछ भी अजीब नही करूँगा, वादा।" "पर मैं तो सबकी किस्मत पहले ही लिख चुका हूँ।" "आप तो God हैं, आप तो कुछ भी कर सकते हैं, एक मौका दे दीजिए ना।" "बात तो तुम्हारी सही है। चलो ठीक है, जाओ दी इजाज़त।" शिराज़ की बात God ने मान ली और उसे एक अनगिनत पन्नो की खाली किताब दी जिसमे में वो जो भी लिखेगा वो सच ह...