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नकारात्मक

Disclaimer

यह एक series की साँतवी कहानी है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता पर अगर आप पहले की 6 कहानियाँ पढ़ने के बाद इसे पढ़े तो इसका मज़ा बढ़ जाएगा।


आबिद की साँस फूलने लगी थी, देखते ही देखते उसकी साँसे रुक गई, सबका मुँह खुला का खुला रह गया। उसका Best friend मार्टिन भी उसे देख रहा था। देखने में यह अस्पताल के bed पर मरने वाले हर दूसरे इंसान जैसी आम मौत लग रही थी पर असल में यह सबसे बुरी मौतो में से एक थी। आबिद को ऐसी मौत क्यों मिली इसके लिए उसकी ज़िंदगी को समझना पड़ेगा।
कितना अच्छा होता अगर इंसान जैसा दिखता है असल में वैसा ही होता, पर ऊपर वाले ने तो लोगो के अंदरूनी और बाहरी रूप अलग-अलग बनाये हैं। हर इंसान दो रूप लिए घूमता है, दुनिया के लिए बनावटी और अपने लिए असली। आबिद भी कुछ ऐसा ही था, बाहर से फरिशता और अंदर से शैतान। ऊपर से एक बहुत अच्छा इंसान लगने वाला आबिद अंदर से बहुत ही ज़्यादा बुरी सोच रखने वाला हैवान था। वो दूसरो में सिर्फ बुराईयाँ देखता था और उसके बदले वो उनका बुरा करने की सोचता रहता था।
आबिद एक college से BBA कर रहा था, वहाँ वो सबके साथ बहुत अच्छे से रहता था, सब उसे बहुत पसंद करते थे लेकिन वो खुद किसी को पसंद नही करता था। मार्टिन और आयूष दोनो उसके दोस्त थे हालांकि मार्टिन के वो ज़्यादा करीब था पर वो भी सिर्फ कहने मात्र के लिए क्योंकि वो दरअसल अपने अलावा किसी के करीब नही था।
अब सोचने वाली बात यह है कि वो ऐसा था क्यों? सच कहा जाए तो इंसान का ऐसा होने के लिए उसके साथ कुछ बुरा होने की ज़रूरत नही है, कोई भी ऐसा हो सकता है, बिना वजह भी। लेकिन बात अगर आबिद की करी जाए तो वो ऐसा इसलिए भी था क्योंकि उसके पापा एक बहुत बुरे आदमी थे। वो आबिद की माँ को मारा करते थे और उन्होने आबिद के बचपन में ही उनको तलाक दे दिया था। हाँ मालूम है, यह तो बहुत लोगो के साथ होता है, पर मैने बताया ना, इंसान को बुरा होने के लिए उसके साथ बुरा होना ज़रूरी नही होता और अगर किस्मत से बुरा हो जाए तो वो तो सोने पर सुहागा होता है।
College शुरू हुए एक महीना हो चुका था और यह बात साबित हो चुकी थी कि आबिद class का सबसे पढ़़ाकू और होशियार student है। एक दिन एक लड़की, मारिया अपने पिता और HOD के साथ class में आयी, पता चला कि उसने अभी Addmission लिया है। वो बुर्का पहने हुई थी, सब उसको देख रहे थे, जब वो अपनी seat पर बैठने के लिए बढ़ी तो आबिद मार्टिन से बोला, "यह यहाँ क्या कर रही है यार, इसको तो किसी मदरसे में Admission लेना चाहिए था।" उस लड़की को तो सब ही हैरानी से देख रहे थे पर सिर्फ एक आबिद ही था जिसने ऐसी बात बोली। वो हमेशा से ऐसा ही था मगर उसकी इस Negative approach को उसके दोस्त और बाकी लोग मज़ाक समझते थे।
मारिया लड़को से बात नही करती थी और यह बात सबने accept कर ली थी पर आबिद जब-तब उसको criticize करता रहता था। वो कहता था, "ऐसे लोग दिखाना चाहते हैं कि यह ही सच्चे मुसलमान हैं बाकी सब तो बेवकूफ बैठे हैं, इनकी नज़र में जो लड़की लड़को से बात करती है उसका कोई ईमान धर्म नही होता, I Hate this show off" आबिद का यह रवैया हर शख्स की तरफ था पर बाकी सबके बारे में वो कभी खुलकर कहता नही था, बस मन ही मन उनके खिलाफ सोचता रहता था।
पहले semester में आबिद ने Top किया था। इस वक्त Second Semester की पहली class चल रही थी और results की बाते हो रही थी, आबिद बहुत खुश था कि आज सब उसकी वाह-वाह करेंगे। Teacher ने आबिद के लिए तालियाँ बजवाईं, आबिद को बहुत अच्छा लगा पर वो ग़ौर से देख रहा था कि कौन ताली बजा रहा है और कौन नही। उसने रवि को देखा कि वो बिना मन के बहुत हल्के-हल्के तालियाँ बजा रहा है, उसे थोड़ा गुस्सा सा आ गया। मार्टिन उसके बिल्कुल पास बैठा हुआ था और वो भी तालियाँ बजा रहा था पर जब तक आबिद की नज़र पूरे class को देखते हुये मार्टिन पर पड़ी तो वो रुक चुका था, आबिद को लगा कि उसने ताली बजाई ही नही। आबिद का गुस्सा बहुत बढ़ गया, पर यह उसकी खासियत थी कि वो अपना गुस्सा ज़ाहिर नही करता था बल्कि जमा करता रहता था। अगले ही पल मार्टिन ने कोई मज़ाक शुरू कर दिया, सब हँसने लगे। आबिद को मार्टिन की यह वक्त-बेवक्त मज़ाक करने की आदत बहुत बुरी लगती थी पर उसने हर बार की तरह इस बार भी ना मार्टिन से कुछ कहा ना अपने दिल के ज़हर को उगला और ऐसे उसका दिल लोगो के लिए और ज़्यादा कड़वा हो गया।
आबिद जिससे भी बात करता था उसे ज़िंदगी के प्रति एक नकारात्मक नज़रिया ही देता था और वो यह इतना Logically करता था कि सुनने वाला उसे Negative नही बल्कि Practical समझता था। दुसरे Semester की बात है जब उसकी अमर से थोड़ी सही बातचीत होना शुरू हो गई थी। अमर वैसे तो वीर का दोस्त था पर वीर उसकी कुछ बातो से सहमत नही होता था इसलिए अब जब उसने आबिद से बात की तो उसे अच्छा लगा क्योंकि आबिद उसकी हर अच्छी-बुरी बात को सही बोलता था। अमर एक दिन बोला, "यार मुझे कभी-कभी यह ज़िंदगी अजीब लगती है क्योंकि जब एक दिन सब खत्म ही हो जाना है तो इसको कुछ भी बनाने का क्या मतलब।"
"हाँ यह बात तो सही है तुम्हारी, मैं भी कभी-कभी यही सोचता हूँ कि चलो माना पढाई कर रहे हैं, top भी कर लिया class में, job भी मिल जाएगी और फिर इतनी मेहनत करने के बाद अचानक मर गए तो?"
"हाँ वही ना, कोई Guarantee नही है life की।"
"पता नही ऊपर वाले ने हमे यहाँ भेजा ही क्यों फिर।"
अमर को लग रहा था कि आबिद कितना अच्छा इंसान है जो उसकी बात समझ रहा है लेकिन आबिद के दिमाग़ में तो कुछ और ही चल रहा था जिसको अमर जैसा सादा इंसान समझ नही सकता था। वैसे गलती अमर की भी नही थी क्योंकि दुनिया में हर इंसान ऐसा ही होता है, जो उससे सहमत हो जाए उसे अपना शुभचिंतक समझने लगता है, चाहे वो बात गलत हो या सही, बल्कि गलत बात पर सहमत होने वाले इंसान को तो वो ज़्यादा ही अज़ीज़ समझता है।
आबिद की अमर से बात होती रहती और वो उसकी इस सोच को पूरा सहयोग करता था बल्कि अपने पास से भी बाते बढ़ा-चढ़ा कर बोलता रहता था। आबिद की बातो का उस पर ऐसा असर पड़ा कि आखिर एक वक्त ऐसा आ गया जब अमर को लगने लगा कि अगर यह दुनिया खत्म ही हो जानी है तो इसमे रहने का क्या फायदा, उसके मन में अब आत्महत्या के ख्याल आने लगे थे।
अमर के ऊपर अपनी बातो का असर होते देख कर आबिद बहुत खुश था। उसे लोगो को Manipulate करना बहुत ज़्यादा पसंद था और वो यह काम आसानी से कर भी लेता था मगर दो लोग ऐसे भी थे जिन पर उसका बस नही चलता था, मारिया और शिराज़। वो दोनो ही जल्दी किसी से बात नही करते थे, बस अपने काम से काम रखते थे। शिराज़ का तो कोई दोस्त भी नही था वो बस लोगो से काम की बात करता था पर मारिया की सना और रीना दोस्त थी। आबिद ने एक दिन सना से कहा, "यह तुम्हारी दोस्त मारिया जो है यह इतनी अजीब क्यों है? क्या मामला है इसका?"
"अरे पता नही क्या है, कुछ बताती ही नही है, हमेशा Serious रहती है।"
"तुमने पूछा नही? तुम तो उसकी best friend हो तुम्हे तो सब पता होना चाहिए।"
"अरे पूछा क्यों नही पर वो टाल देती है, बताती ही नही।"
"तो एक काम करो उससे कहो कि अगर मुझे दोस्त मानती हो तो बताओ क्या बात है वरना रहने दो। दोस्त हो यार तुम उसकी, बेचारी परेशान सी रहती है, तुम्हारा फर्ज़ है उसकी मदद करना, क्या पता वो किसी मुसिबत में हो।"
सना को आबिद की बात बिल्कुल ठीक लगी उसने वही किया जो आबिद ने कहा था। अगले ही दिन आबिद ने सना, रीना और मारिया को Cafe जाते देखा, वो समझ गया कि कुछ हुआ है क्योंकि मारिया कभी cafe नही जाती थी। उनके पीछे वो भी Cafe गया लेकिन उसकी बदकिस्मती की वो कुछ सुन नही पाया। मारिया उन दोनो को कुछ बता तो रही थी पर इतनी धीमे की दूसरी मेज़ तक कोई बात साफ समझ नही आ रहा थी। यहाँ मात खाने के बाद आबिद ने सना से पूछा पर सना ने Private Matter कह कर कुछ भी बताने से मना कर दिया। आबिद की दाल यहाँ भी नही गली पर वो फिर भी सोचता रहता था कि मारिया के बारे में कैसे पता लगाया जाए। वो शिराज़ के बारे में पता लगाने की भी कोशिश करता था पर शिराज़ ने उससे साफ कह दिया कि वो यहाँ सिर्फ पढ़ने आया है, उसे इस College में किसी से कोई रिश्ता नही बनाना।
आबिद का दिमाग़ ऊपर वाले ने कुछ ज़्यादा ही तेज़ बनाया था, वो सबकी तहकीकात भी करता था और पढाई भी और दोनो ही चीज़ो में Top करता था। एक साल पूरा हुआ और आबिद ने दोनो ही Semester में Top किया लेकिन आबिद Satisfied नही था और ऐसा था उसके दोस्त मार्टिन की वजह से। मार्टिन के होते आबिद को वो Attention नही मिल पाता था जो वो चाहता था क्योंकि मार्टिन एक बहुत ही ज़्यादा मज़ाकिया और ज़िंदादिल इंसान था और यह चीज़ उसे Class का Favourite बना देती थी। आबिद के दिल में अच्छाई तो किसी के लिए नही थी पर मार्टिन के लिए अब उसके दिल में गुस्सा बढ़ता जा रहा था।
आयूष से उसे कोई परेशानी नही थी क्योंकि वो class में ना होने के बराबर था। वो पढाई में भी अच्छा नही था, हर semester में एक Back तो उसकी लग ही जाती है उसकी, लड़कियाँ उससे बात नही करती थी, लड़को को भी उससे कोई मतलब नही था और यह बाते आबिद को बहुत खुश करती थी। आयूष तो जैसे आबिद का चमचा बनकर रह गया था, वो जो चाहता था उससे दोस्ती के नाम पर करवा लेता था।
दूसरा साल शुरू ही हुआ था कि आबिद को BJMC की एक लड़की बहुत पसंद आ गई। उसने सोचा मार्टेिन को बताए मगर अब उसके दिल में मार्टिन को लेकर एक अजीब सा गुस्सा भरा हुआ था तो उससे कुछ कहे बिना वो उस लड़की से एक दिन Cafe में मिला। उसने लड़की से आराम से बैठने को कहा, वो लड़की हिचकिचा रही थी पर फिर वो बैठ गई। आबिद बोला, "मेरा नाम आबिद है, देखिए मुझे यह सब कहना नही आता पर मैं जो कह रहा हूँ दिल से कह रहा हूँ, मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ, क्या आप मेरी Girlfriend बनोगी?"
आबिद दो seconds रुका और बोला, "नही कोई जल्दी नही है, आराम से सोचकर भी बता सकती हो।"
आबिद काफी nervous था, और वो पहली बार दिल से किसी से यह कह रहा था कि वो उसको पसंद करता है। उसे वो लड़की सचमुच ही अच्छी लग रही थी।
वो लड़की बोली, "भईया क्या बोले चले जा रहे हो, मेरा Already boyfriend है।"
"लड़को को टालने के लिए हर लड़की यही बोलती है मुझे पता है पर please मेरी बात समझिए, मैं time pass नही करना चाहता, सचमुच आपसे प्यार करता हूँ।"
"अरे मैं भी सच बोल रही हूँ मेरा Boyfriend है।"
"कौन है?"
"क्या मतलब कौन है, एक लड़का है।"
"लड़का तो है पर कौन लड़का, अगर आप सच बोल रही हैं तो मिलवाइए।"
"हाँ यही सही है, उसे यहीं बुला लेती हूँ, वो ही खबर लेगा तुम्हारी।"
उस लड़की ने अपने Boyfriend को phone करके बुलाया। वो दोनो इंतज़ार करने लगे, 4-5 मिनट ही गुज़रे थे कि उसका Boyfriend आ गया, आबिद ने मुड़कर देखा, वो मार्टिन था। आबिद का मुँह खुला का खुला रह गया, उसका मन हुआ कि भागता हुआ जाए और मार्टिन का गला पकड़ कर उसे Cafe के दरवाज़े को तोड़ते हुए बाहर ले जाए और बहुत मारे। लेकिन वो ऐसा कुछ कर नही सकता था इसलिए चुपचाप खड़ा रहा, मार्टिन आया और बोला, "अरे आबिद तुम?"
"I am sorry मुझे नही पता यह तुम्हारी girlfriend है और पता होता भी कैसे तुमने बताया ही नही।"
आबिद ने यह बात नाराज़गी के लहजे में कही थी पर वो नाराज़गी भी झूठी थी क्योंकि अगर असली नाराज़गी वो दिखाता तो मार्टिन का सिर फूट चुका होता।
मार्टिन बोला, "यार Sorry तो मैं हूँ मैने तुझे साक्षी के बारे में  बताया नही, दरअसल इसी ने मना किया था कि किसी को मत बताना इसीलिए मैने नही बताया। सिर्फ चेतना को पता था और वो भी इसलिए क्योंकि उसी ने इससे बात कराई थी पर आज देखो इसने खुद तुम्हे बता दिया। इन लड़कियों को सच में कोई नही समझ सकता।"
"क्या यार अजीब Misunderstanding हो गई।"
"हाँ but i hope we are good."
"हाँ हाँ अरे कोई ना, बस आगे से जो करना बता देना, वैसे कब से चल रहा है यह?"
"यही कुछ 3-4 महीने हुए हैं, second semester के exams के वक्त हम लोग relation में आये थे।"
"वाह, आपकी नाक के नीचे क्या-क्या हो जाता है और आपको पता ही नही चलता।"
"ऐसा ना बोलो यार।"
"अरे मज़ाक कर रहा हूँ।"
मार्टिन और साक्षी को लगा कि सब ठीक हो गया मगर आबिद की नज़रो में तो अब सब बिगड़ा था। उसको पहली बार किसी के लिए दिल से अच्छा feel हुआ था पर उसी इंसान की वजह से उसके दिल की कड़वाहट और ज़हर में इज़ाफा भी हो गया था। उसने उस पल ही सोच लिया कि मार्टिन का कुछ तो करना पड़ेगा।
अमर का जो दोस्त वीर था वो college के सबसे Handsome लड़को में से एक था और इसके साथ वो आदत का भी अच्छा था मगर यह आबिद को कैसे बर्दाश्त हो सकता था कि एक इंसान सबको सिर्फ अच्छा लगे।आबिद को यह तो पहले से ही पता था कि वीर को लड़कियाँ पसंद करती है तो बस उसने अपने शातिर दिमाग़ का इस्तेमाल करते हुए बहुत सारी अलग-अलग लड़कियों से वीर के बारे में बात करी और उन्हे वीर को propose करने के लिए Indirectly उकसा दिया।
आबिद का Plan यह था कि 20-25 में से कम से कम 10 लड़कियाँ तो वीर से बात करेंगी और जब इतनी लड़कियाँ उसे Propose करेंगी तो वो सब तो accept नही कर पाएगा और Reject होने वाली लड़कियों का ego hurt होगा और वो उसके बारे में College में बकवास करना शुरू कर देंगी और वीर ने अगर लालच में आकर एक से ज़्यादा proposal accept कर लिए तब तो बस Game Over.
यह आबिद का Plan था और आबिद के Plans जल्दी Fail नही होते। वीर लड़कियों की नज़रो में कुछ ही वक्त में PlayBoy कहलाया जाने लगा और वो भी सिर्फ इसलिए कि वो बात तो हर लड़की से कर लेता है पर किसी से commitment नही करता।
चौथा Semester आ गया, class में वीर और सीमा के Relationship की चर्चा चल रही थी, सबको लग रहा था कि वो दोनो GF/BF हैं पर एक दिन अचानक सीमा ध्रुव के साथ नज़र आयी और उसने खुल कर कह दिया कि वो उसका Boyfriend है। इन चीज़ो पर एक आम इंसान इतना ज़्यादा ग़ौर नही करता पर आबिद तो हर छोटी-छोटी बात notice करता था, वो समझ गया कि कोई ना कोई बात तो ज़रूर है। आबिद को वैसे भी कुछ करने के लिए कोई वजह नही चाहिए होती थी और फिर इस मामले के बीज तो उसी के बोये हुए थे इसलिए वो हर हाल में जानना चाहता था कि exactly हुआ क्या है। 
अगले दिन आबिद ने अमर से पूछा तो उसे भी नही पता था मगर दो ही दिन बाद उसने बताया, "बात काफी लम्बी चौड़ी है, वीर ने अपने Blog में लिख दी है उसमें पढ़ लेना।"
आबिद ने Blog पढ़ा तो पता चला कि वीर को तो Commitment का Phobia है, यह पढ़ कर आबिद को हँसी आ गई कि वो जल भी किससे रहा था। उसने एक तुक्का लगाते हुए सीमा का Blog भी खोला और किस्मत ने फिर आबिद का साथ दिया और यहाँ भी बहुत सारी जानकारी मिल गई। खास तौर पर यह कि उसने ध्रुव को Boyfriend सिर्फ वीर को सबक सिखाने के लिए बनाया है। बस फिर क्या था आबिद ने सबसे पहले तो सीमा के Blog का link ध्रुव को भेजा। फिर वो सोचने लगा कि अब वीर का Blog किसे भेजे जो पूरे Class में फैला दे मगर उसे इंतज़ार करना था क्योंकि उसने अभी अगर यह किया तो अमर समझ जाएगा कि यह उसकी हरकत है। एक हफ्ते बाद उसने वीर का Blog अपने चमचे आयूष को भेज दिया और उसने आबिद का अधूरा काम कर दिया।
जब वीर और सीमा के Blogs का मालमा Class में चल रहा था उस दौरान अमर मुम्बई गया हुआ था। अमर के जाने से पहले आबिद ने उससे कहा था, "मुझे पता है तुम यूँ Semester के बीच में मुम्बई घूमने क्यों जा रहे हो, अब जा ही रहे हो तो बस अपने जीवन का मकसद ढूँढ कर ही आना।"
आबिद के कहने का मतलब यह था कि जाओ जीवन का मकसद ढूँढो और वो ना मिले तो वहीं कहीं डूब मरना। अमर से उसे ज़र्रा बराबर भी कोई परेशानी नही थी पर फिर भी वो उसके मरने का सोचकर Excited हो रहा था। 5 दिन हो गए, वीर और सीमा का मामला भी निपट चुका था। एक सुबह जब आबिद College पहुँचा तो उसने देखा कि वीर और अमर Main Gate पर खड़े बात कर रहे हैं, वो हैरान हो गया कि अमर ज़िंदा वापस आ गया। वो उन लोगो के थोड़ा पास पहुँचा तो उसने सुना अमर कह रहा था, "अरे अच्छा किया reply नही किया पागल आदमी है वो, इसको छोड़ो चलो अंदर चलो मैं बताता हूँ मुंबई में क्या-क्या हुआ।"
दोनो चले ही थे कि अचानक बहुत तेज़ bike की आवाज़ आयी उन तीनो ने मुड़कर देखा तो वो रवि था उसे देख कर अमर बोला, "कितनी तेज़ bike चलाता है यह, पक्का यह साला किसी दिन accident में ही मरेगा, देखना।"
आबिद ने बाद में अमर से पूछा कि Trip कैसी रही तो उसने सब बताया कि कैसे इस Trip ने उसकी ज़िंदगी बदल दी, आबिद का यह Plan Fail हो गया।
उसका तीसरा साल भी ऐसे ही छोटी-मोटी हरकते करते और लोगो की ज़िंदगी जहन्नुम बनाते गुज़र गया और फिर आया Farewell का दिन, इस दिन के लिए उसके पास एक बड़ा Plan था। सुबह-सुबह आबिद, मार्टिन, चेतना और साक्षी Cafe में बैठे बाते कर रहे थे। तय नही हो पा रहा था कि क्या खाया जाए आखिर मार्टिन बोला, "अरे तुम लोग तो कभी decide ही नही कर पाओगे, मैं और साक्षी जाते हैं कुछ लेकर आते।"
वो दोनो चले गए और उनके पीछे चेतना भी यह कहते हुए चली गई कि, "यह मार्टिन मेरे लिए पक्का कुछ बेकार उठा लाएगा, मैं भी जाती हूँ।"
आबिद मेज़ पर अकेला रह गया, सबके phone और उसका Laptop भी वहीं था। उसने फटाफट रुमाल से पकड़कर साक्षी का Phone उठाया और Unlock कर लिया। उसे पता था कि साक्षी के Mobile का Password 'MARTIN' है। WhatsApp Web का इस्तेमाल करके उसने अपने Laptop में उसका WhatsApp खोल लिया और mobile को अपनी जगह पर रख दिया।
वो लोग 5 मिनट बाद मैगी लेकर वापस आ गए। मार्टिन ने आबिद से पूछा, "आज Laptop क्यों लाए हो?"
"Photos लेने के लिए, बाद में फिर जल्दी कोई देता नही है।" आबिद ने जवाब दिया।
Party लगभग खत्म होने वाली थी, सब मस्त थे, मार्टिन, चेतना और आबिद एक जगह खड़े बात कर रहे थे और साक्षी अपने class में थी। आबिद बोला, "अच्छा सुनो, यहाँ तो अब कुछ बचा नही है तो मैं तो चल रहा हूँ, घर पर भी कुछ काम है, Okay, फिर मिलेंगे।"
यह बोलकर आबिद College के बाहर गया और Laptop से मार्टिन को चेतना के WhatsApp से message किया, "college building की terrace पर आ जाओ, एक surprise है तुम्हारे लिए, किसी को बताना मत, अकेले आना।"
यह Message करके वो भागता हुआ College के पीछे गया, उसे पता था कि Hostel के लड़के कहाँ से आया जाया करते हैं वहीं से वो College में घुसा और छुपता-छुपाता college building की छत पर पहुँच गया। वो Building College की पिछली दीवार के बिल्कुल करीब थी इसलिए आबिद को ज़्यादा मुश्किल नही हुई। 
मार्टिन जब वहाँ पहुँचा तो उसे आबिद मिला, उसने आबिद से हैरानी से पूछा, "तुम यहाँ? तुम तो चले गए थे।"
"हाँ गया था पर तुम्हारे लिए वापस आ गया।"
"मेरे लिए? क्यों क्या हुआ? और वो message तुमने किया था साक्षी के phone से?"
"हाँ मैने ही किया था तुम्हे बुलाने के लिए।"
"बताओ क्या हुआ?"
"कुछ खास नही बस तुमसे कुछ Confess करना था।"
"अरे यार ऐसे suspense create करके डरा क्यों रहे हो? जल्दी बताओ क्या बात है?"
"इसमें कोई शक नही कि मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ, तुम मेरे best friend हो, लेकिन तुम्हे जैसे पता है कि मैं class का topper हूँ पर मुझे class में जो attention मिलनी चाहिए थी वो आज तक नही मिल पाया, क्यों? क्योंकि तुम जो मौजूद थे। सबका attention इन तीन साल सिर्फ तुम पर रहा, आबिद ने top किया OK, पर वो देखो मार्टिन ने कितना अच्छा joke मारा है।"
"अरे यार, यह सब क्या बोल रहा है तू, अब इसमे मेरी तो कोई गलती नही है, और अगर मुझे पता होता कि तुझे इस बात से दिक्कत है तो मैं side हो जाता।"
"हो ही ना जाते, छोड़ो मियाँ।"
"आज तक तुमने कुछ नही कहा तो आज अचानक से क्या हो गया।"
"मैं बस चाहता था कि तुम्हे मरने से पहले पता हो कि तुम क्यों मर रहे हो?"
"क्या?"
मार्टिन ने ध्यान नही दिया था कि वो लोग छत के बिल्कुल किनारे पर खड़े हुए थे। आबिद उससे साक्षी के बारे में भी कहना चाहता था पर वक्त बहुत कम था इसलिए उसने यह कहते हुए उसे अचानक से धक्का दे दिया कि, "It's your last day of being centre of attraction."
आबिद उसे धक्का देकर सीधे जाकर top floor के washroom में छुप गया, और जब शोर कम हुआ तो जैसे आया था वैसे ही फौरन वापस निकल गया।
उधर साक्षी को कोई खबर नही थी कि क्या होने वाला है, वो अपने Class में busy थी। Recess में उसके दोस्तो ने उसे मना किया कि आज Mess ना जाना Cafe में चलकर कुछ खाते हैं, उनको वो मना नही कर सकती थी पर उसने उनसे कहा कि तुम लोग जाओ मैं थोड़ी देर में कुछ काम निपटा कर आती हूँ। काम निपटाने के बहाने वो Mess चली गई और जल्दी से अपना पसंदीदा खाना खाकर Cafe पहुँची। Cafe में पहुँचकर उसने ध्यान दिया कि उसका Mobile उसकी जेब में नही है। खाना छोड़कर वो सब Phone ढूँढने में लग गए। बात Teachers तक भी पहुँची, आखिर Mobile Mess वाले रास्ते पर पड़ा मिला, उसके दोस्त उससे पूछने वाले थे कि तुम तो Mess गई नही तो यह यहाँ कैसे पहुँचा पर उससे पहले ही चेतना का Phone आया और उसने मार्टिन के बारे में बताया। साक्षी छुट्टी लेकर सीधी अस्पताल पहुँची।
मार्टिन को देखने लगभग सब ही लोग अस्पताल आए थे, आबिद भी। मार्टिन Coma में चला गया था और इस हादसे में Police भी शामिल हो गई थी। 
Police को सिर्फ इतना पता चला था कि मार्टिन के phone पर साक्षी का message आया था उसे छत पर बुलाने के लिए पर साक्षी ने बताया कि उसका Phone उसके bag से किसी ने या तो निकाल लिया था या गिर गया था और वो वही ढूंढ रही थी। दो teachers और उसके कुछ दोस्त इस बात के गवाह थे कि वो पूरे वक्त उनके साथ थी और आखिरकार उसका phone field में ऐसी जगह पड़ा मिला, जहाँ से वो गुज़री तक नही थी। इससे यह साबित हो गया था कि किसी ने साक्षी का phone चोरी कर के मार्टिन को छत पर बुलाया था, मगर वो कौन था यह पता नही चल पाया। Police ने साक्षी से पूछा, "तुम्हारे phone में password तो होगा, तो ऐसे कैसे हो सकता है कि एक अंजान इंसान phone को unlock कर के message कर दे?"
"password तो है पर वो सिर्फ नाम के लिए है क्योंकि मैं जितने भी लोगो से बात करती या मिलती हूँ सबको मेरा password पता है। मेरा password 'MARTIN' है, जिसको नही भी पता है वो भी 1 minute में खोल सकता है।"
साक्षी ने यह किसी को नही बताया कि वो उस दिन Mess गई थी क्योंकि अगर वो ऐसा करती तो उस पर शक बड़ जाता तो उसने सोचा जो हो रहा है वही सही है। उसे इस बात पर गुस्सा आ रहा था कि जाने उसका Phone किसने निकाल लिया या गिर गया जिसके चक्कर में यह सब हो रहा है पर उसे यह नही पता था कि अगर उसका Phone नही गिरता तो वो अपने आप को किसी भी हाल में सही साबित नही कर पाती। आबिद का यही Plan था कि वो एक तीर से दो निशाने करेगा, मार्टिन मर जाएगा और साक्षी को जेल हो जाएगी पर दोनो काम पूरे नही हो पाए।
आबिद ने किसी को Call करने के बहाने से साक्षी का Phone लिया और उसमे से अपने Laptop को Log out कर दिया।
College की CCTV Footage भी देखी गई पर उसका भी कोई फायदा नही हुआ क्योंकि Cameras सिर्फ Corridors में थे, जिसमे से 1-2 तो खराब ही थे और जो सही भी थे उसमे भी सिर्फ मार्टिन ही दिख रहा था। Phone पर कोई fingerprint भी नही मिले, Police समझ नही पा रही था कि यह कौन है जो इतनी आसानी से एक इंसान को छत से धक्का देकर गायब हो गया।
दो हफ्ते हो गए आबिद को मार्टिन को मारने मौका नही मिला और मार्टिन होश में भी नही आया। अब आबिद निश्चिंत हो गया था क्योंकि उसे पता था कि अगर अब 3-4 हफ्ते बाद मार्टिन होश में आ भी गया तो वो इतना Confuse होगा कि उसका कुछ बिगाड़ नही पाएगा।
इस दौरान आबिद और चेतना मार्टिन के माँ-बाप से रोज़ मिलने आते थे, चेतना उनके दुख को बाँटने और आबिद उनके दुखड़े का मज़ा लेने।
कुछ वक्त बाद college में exam शुरू हो गए, आबिद ने अस्पताल जाना बंद कर दिया और चेतना से भी कहा कि अपनी साल ना बर्बाद होने देना तो उसने भी जाना बहुत कम कर दिया। Exams खत्म हुए ओर हमेशा की तरह आबिद ने Top किया, उसका फौरन दिल्ली में एक Company में Placement भी हो गया। चेतना भी अपने घर बनारस लौट गई।
आबिद दिल्ली में Job करने लगा पर वो खबर सबकी रखता था। उस पर अब और ज़्यादा ज़िम्मेदारी आ गई थी, Job की नही लोगो की ज़िंदगी नर्क बनाने की। उसने दिल्ली में बहुत कुछ किया, एक बार रवि उसकी Company में Interview देने आया तो उसने HR से साफ कह दिया कि इसे ना लेना यह college के समय से ही बहुत लापरवाह है।
चार साल हो गए, आबिद को मार्टिन की कोई खबर नही थी। खैर उसे क्या किसी को भी अब मार्टिन की कोई खबर नही थी। फरवरी 2020 में उसकी माँ की तबियत बिगड़ी तो उन्होने उसे घर बुलाया, वो आना नही चाहता था क्योंकि वो दिसम्बर में आ चुका था पर उसे आना पड़ा। Station से जब वो बाहर निकल कर रिक्शा की तरफ जा रहा था तभी अचानक दो साँड आपस में लड़ने लगे। आबिद Earphones लगाए हुए था, उसे अपने आसपास की कोई खबर नही थी वो मस्ती में चलता चला जा रहा था कि अचानक उसके पीछे से दोनो साँड आकर टकराये और आबिद काफी ऊँचा उछल गया। वो बहुत दूर जाकर गिरा, उसे लगा जैसे उसे किसी ने उसे 3-4 मंज़िल से फेंक दिया हो।
उसकी आँखे खुली तो वो एक अस्पताल में था, उसे नही पता था पर यह वही अस्पताल था जिसमें मार्टिन भर्ती था। उसकी माँ भी उसके पास थी, हालांकि उनकी खुद बहुत तबियत खराब थी पर जब बेटा बिस्तर पर पड़ा हो तो माँ के अंदर असीम शक्ति आ ही जाती है। आबिद की पसलियों में गंभीर चोट आयी थी, आंतरिक रक्तस्राव हो रहा था और सिर भी फूट चुका था।
एक दिन बीत गया, अगले दिन जब उसकी आँख खुली तो उसके पास शिराज़ बैठा हुआ था, वो उसे देखकर चौंक गया और बोला, "तुम? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?"
"तुम्हे देखने आया हूँ।"
"पर तुम्हे कैसे पता चला कि मेरा accident हुआ है और मैं यहाँ Admit हूँ?"
"मुझे सब पता है, वो भी जो तुम्हे पता है और वो भी जो तुम्हे नही पता, जैसे कि तुम उसी Hospital में हो जहाँ तुम्हारी वजह से मार्टिन और रवि पहुँचे थे।"
"मेरी वजह से? क्या बकवास कर रहे हो?"
"अरे मियाँ, मुझे मालूम है कि मार्टिन को छत से धक्का तुम ही ने दिया था और पिछले साल दिसम्बर में रवि की शादी वाले दिन उसकी Bike के Brake के तार भी तुमने ही काटे थे जिसकी वजह से उसका Accident हुआ और वो मर गया"
आबिद की आँखे बड़ी हो गई, वो समझ नही पा रहा था कि क्या बोले। आखिर बड़ी मुश्किल से उसने कहा, "तुम्हे यह सब कैसे मालूम?"
"मैं बताऊँगा तो तुम विश्वास नही करोगे पर चलो कोई ना, विश्वास तो मैं करवा ही दूँगा। सुनो, दरअसल तुम्हारी कहानी मैने ही लिखी है इसलिए मुझे पता है कि क्या हुआ था और क्या होगा। और सिर्फ तुम्हारी नही बल्कि वीर, अमर, रवि, मारिया और बाकी कई लोगो की लिखी है।"
"सीधी तरह बताओ कैसे जानते हो? बकवास मत करो"
"ओफ्फो! यह बड़ी एक तो परेशानी है कि तुम्हे भरोसा किसी पर नही होता, चलो एक काम करो मेरी पूरी बात सुन लो फिर मैं तुमको सबूत दूँगा कि तुम सबकी कहानी मैंने लिखी है।"
"मुझे कुछ नही सुनना।"
"सुनना तो बेटा तुम्हे पड़ेगा, और एक बात, जब आपकी पसलियाँ टूटी हुई हों तो आपको अकड़ नही दिखानी चाहिए।"
"बको"
"यह देखो मेरे पास यह एक Diary है इसमें मैं जो चाहूँ लिखूँ वो सच होता है। मैंने इसमें तुम्हारे Class के करीब 8-10 लोगो की कहानी लिखी है। कुछ की पूरी है तो कुछ की अधूरी पर आज तक मैंने किसी को कुछ बताया नही ना उनसे मिला लेकिन तुमसे मिलने और तुम्हे यह बताने के मेरे पास दो कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि तुम इन सारी कहानियों में इकलौते Negative Character हो और मेरे favourite भी। दूसरा कारण यह है कि तुम्हारी कहानी का end मुझे समझ नही आ रहा था कि क्या लिखूँ। देखो मैंने यह सोचा था कि तुम ज़िंदगी भर बुरे काम करोगे और मरते वक्त तुम्हे अहसास होगा कि तुमने अपनी पूरी ज़िंदगी गलत तरह से जी है और इसी भयंकर ग्लानि के साथ तुम मर जाओगे लेकिन परेशानी यह आ गई कि मेरे समझ ही नही आ रहा था कि तुम्हारी life में ऐसा क्या हो कि तुम्हे सब अहसास हो जाए। फिर मुझे ख्याल आया कि क्यों ना मैं तुम्हारे पास आकर तुम्हे सब बता दूँ और यहीं तुम्हारे सामने तुम्हारा अंत लिखूँ।"
आबिद को उसकी किसी बात पर कोई भरोसा नही हो रहा था, उसके तो समझ ही नही आ रहा था कि शिराज़ जब कभी College में उससे नही बोला तो यहाँ क्यों आया है। शिराज़ ने Diary खोली और बोलते हुए लिखना शुरू किया, "आबिद अपनी मृत्यूशय्या पर लेटा अपनी मौत का इंतज़ार कर रहा था पर मौत के आने से पहले अचानक उसके मन में आत्मग्लानि आना शुरू हो गई। उसने अपनी ज़िंदगी में जो कुछ भी गलत किया था वो सब उसके दिमाग़ में एक film की तरह चलने लगा और उसे अहसास होने लगा कि उसने लोगो के साथ कितना ज़्यादा गलत किया है। मार्टिन का Coma, रवि की मौत, अमर की मानसिक स्तिथि और बहुत कुछ उसको महसूस हो रहा था।"
शिराज़ जैसा-जैसा लिख रहा था आबिद को ठीक वैसा ही महसूस हो रहा था, उसकी आँखो से आँसू निकलना शुरू हो गए, वो बेइंतेहा रोने लगा। शिराज़ बोला, "तुम्हे क्या लगता है, तुम जैसे इंसान के साथ क्या होना चाहिए।"
"मेरे लिए तो फाँसी भी कम है, मैने लोगो की ज़िंदगी बर्बाद की है। मुझे तो...मुझे तो माफी भी नही मिलनी चाहिए पर फिर भी काश एक मौका मिल जाए तो मैं लोगो से माफी माँगना चाहूँगा।"
"नही यह तो नही होने वाला, कहानी का Villain भी अगर माफी माँगने लगे तो फिर क्या फायदा। चलो तुम्हारे इस दर्दनाक अंत का level बढ़ाते हैं, बाहर देखो कोई दिख रहा है?"
आबिद ने बाहर देखा तो Ward के बाहर मार्टिन Wheel-chair पर बैठा हुआ था, आबिद उसे देखकर चौंक गया क्योंकि वो ठीक हो चुका था। आबिद कुछ बोलता उससे पहले शिराज़ बोला, "अब मार्टिन तुम्हे देखेगा और उसे सब याद आ जाएगा, फिर वो सबको बता देगा कि तुमने क्या किया था और तुम्हारे मरने के बाद सब तुमसे नफरत करेंगे। कैसा लगा कहानी का End?"
"बहुत बुरा, Why the hell are you doing this, WHY? तुम आखिर हो कौन?"
"मैं कौन हूँ? यह बताने से बेहतर है मैं तुम्हे कुछ दिखाता हूँ।"
आबिद शिराज़ को ग़ौर से देख रहा था, अचानक शिराज़ की पीठ से दो बड़े-बड़े पर निकले, आबिद उन परो को देखकर डर गया लेकिन अगले ही पल पर वापस अंदर चले गए। शिराज़ बोला, "खैर मुझे तो बहुत अच्छा लगा End, इससे अच्छा और क्या हो सकता है कि तुम्हारी वजह से जिसकी ज़िंदगी के चार साल बर्बाद हुए वो तुम्हे अपने सामने मरते हुए देख ले। वैसे एक बात है ना, मैने तुम्हे Villain बनाया पर तुम्हे तो मैं अब मार दे रहा हूँ, तो मैं तो तुमसे बड़ा Villain हो गया। सही बात है यार, कहानी का सबसे बड़ा Villain कहानी का लेखक ही होता है।"
आबिद डरा, सहमा और ग्लानि में लिप्त रो रहा था और शिराज़ लगातार बोल रहा था, "आज से करीब 7 महीने बाद तुम्हारे Class की Reunion होगी और उस दिन मैं आखिरी कहानी लिखूँगा, कहानी का नाम होगा 'लेखक' , देखो मैने सिर्फ तुम्हे बताया है किसी और को मत बताना, हाहा, और हाँ यह भी जान लो कि मैने तुम्हारी कहानी का नाम 'नकारात्मक' रखा है।"
यह सब कह कर शिराज़ ने Doctor को आवाज़ दी, Doctor आया तो आबिद की साँस फूल रही थी, उसकी मम्मी कुछ दवाईयाँ लेने गई हुई थी पर अब वो भी आ चुकी थी। देखते ही देखते आबिद की साँसे रुक गईं। शिराज़ उसकी माँ को सहानुभूति देकर चला गया।

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