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चेतना

Disclaimer

यह एक series की छठी कहानी है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता है तथा यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है


हर माँ-बाप अपने बच्चे को पालने में अपनी जान झोंक देते हैं, लेकिन मार्टिन के माँ-बाप (अक्षय जेम्स और सिमरन जेम्स) के लिए यह जद्दोजहद थोड़ी ज़्यादा मुश्किल रही थी क्योंकि मार्टिन ने बोलना और चलना बाकी बच्चो के मुकाबले थोड़ी देर में शुरू किया था। पर एक बार जो उसने चलना और बोलना शुरू किया तो बस फिर तो उसे रोकना ही मुश्किल हो गया, उससे ज़्यादा बाते करने वाला और भाग-दौड़ करने वाला बच्चा उसके माँ-बाप ने दूसरा नही देखा था। वो जहाँ जाता था अपनी ज़िंदादिली से लोगो का दिल जीत लेता था, वो मोहल्ले के लोगो का भी लाड़ला था और School में Teachers भी उसे बहुत पसंद करते थे।
2012 में वो College पहुँचा, हालांकि पहले दिन वो थोड़ा सा घबराया हुआ था पर उसका मिजाज़ ऐसा था कि वो हर जगह आसानी से ढल जाता था। कुछ ही दिन में वो class में भी Adjust हो गया और मारिया के अलावा सबसे बात करने लगा क्योंकि वो लड़की किसी लड़के से बात नही करती थी। मारिया के अलावा एक लड़का शिराज़ भी था जो ज़्यादा किसी से बात नही करता था, वो बस पढ़ाई करता और कुछ ना कुछ लिखने में लगा रहता था, हालांकि मार्टिन उससे भी बोलने की काफी कोशिश करता था।
मार्टिन ने class में देखा कि लोग हर किसी से बात नही करते, बल्कि उन्होने Groups बना लिए हैं और बस आपस में लगे रहते हैं लेकिन वो किसी Group का हिस्सा नही बना। मार्टिन पढाई में average था, और average लोगो को कोई भाव नही देता पर वो लोगो का दिल जीतने में बिल्कुल भी average नही था, उसमे तो वो Pro था इसलिए वो जब-तब class का Centre of attraction बना रहता था।
एक इंसान friendly तो सबसे हो सकता है पर सबका friend नही हो सकता इसलिए मार्टिन भी Friendly तो सबसे था पर वो Friend सिर्फ दो लोगो का था, आबिद और चेतना। आबिद class का topper था और चेतना वो लड़की थी जिसे सब Egoistic और boring समझकर उससे बात नही करते थे पर सिर्फ मार्टिन जानता था कि वो कितनी humble और sensible थी।
आबिद और चेतना आपस में ज़्यादा बात नही करते थे क्योंकि आबिद की नज़रो में भी चेतना egoistic ही थी। अब यह कहना मुश्किल है कि चेतना सचमुच ऐसी थी और मार्टिन के साथ सही से पेश आती थी या मार्टिन के अलावा कोई और उसे सही से समझ नही पाया था। दूसरा semester खत्म होने से पहले ही चेतना की बदौलत मार्टिन की एक Girlfriend भी बन गई थी। वो लड़की चेतना के साथ Hostel में रहती थी तो चेतना ने उसकी बात मार्टिन से कराई और मार्टिन तो ठहरा बातो का बादशाह, बस बात बन गई।
उसका वक्त college में अच्छा गुज़र रहा था, उसे ज़िंदगी में कभी किसी चीज़ की कमी नही हुई थी, और college में भी उसने कोई परेशानी नही देखी थी। एक दिन अचानक class में वीर के Blog की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया, पता चला कि वीर को कोई commitment का phobia है। मार्टिन यह सब पहली बार सुन रहा था पर उसे ज़्यादा हैरानी इस बात की हुई कि वीर की girlfriend समझी जाने वाली सीमा ने वीर का साथ देने के बजाए दूसरा Boyfriend बना लिया। उसे वीर के लिए बुरा लग रहा था, दरअसल उसे अपनी ज़िंदगी में किसी भी चीज़ का पहली बार दिल से बुरा लग रहा था पर आज बातो के बादशाह के पास वीर से बात करने के लिए कुछ नही था।
कुछ ही दिन गुज़रे होंगे कि एक दिन Recess में जब मार्टिन cafe से class जा रहा था उसने देखा कि रवि और रीना खड़े बात कर रहे हैं, उसने हमेशा notice किया था रवि ज़्यादातर Serious रहता था और उसे कुछ ही दिन पहले पता चला था कि रवि के पापा की काफी पहले ही death हो चुकी है और अभी जो उसके पापा College आते हैं वो सौतेले हैं, इसलिए उसे रवि और उसकी बातो मेें Interest आता था। वो वहीं पर छुप कर उनकी बाते सुनने लगा, बाते सुनकर पता चला कि रवि ने रीना को propose किया और उसने मना कर दिया। मार्टिन ने रवि का चेहरा देखा और उस पर उसे जो दर्द दिखा उसको देखकर मार्टिन को बहुत बुरा लगा।
मार्टिन उस दौरान थोड़ा गहराई से सोचने लगा था कि उसे हर चीज़ कैसे आराम प्लेट में परोसी हुई मिल गई है पर कुछ लोगो के लिए ज़रा सी चीज़ पाना भी पहाड़ तोड़ने जैसा है। ज़िंदगी की असल मुश्किलो की तो मार्टिन ने कल्पना तक नही की थी, उसको यह छोटी-छोटी चीज़े देखकर ही मुश्किलो का अहसास हो रहा था। college जैसे-जैसे खात्मे की तरफ बड़ा वैसे-वैसे मार्टिन थोड़ा mature होता गया।
देखते ही देखते Farewell वाला दिन आ गया, farewell में मारिया के अलावा लगभग सभी लोग आये थे, क्योंकि मारिया के घर वाले उसे पढ़ाई के अलावा किसी चीज़ की इजाज़त नही देते थे। उस दिन सब बहुत खुश भी थे और Emotional भी, चेतना मार्टिन के पास आयी और बोली, "कैसी लग रही हूँ मैं?"
"काली साड़ी में चुड़ैल लग रही हो, जाओ किसी पेड़ पर जाकर लटक जाओ।"
"बोल लो बोल लो, आज जो चाहो बोल लो, कुछ नही कहूँगी। हमारा college खत्म हो रहा है यार, 3 साल पता ही नही चले।"
"अरे तुम तो senty हो रही हो, college खत्म हो रहा है ज़िंदगी थोड़ी, हम लोग तो मिलते रहेंगे।"
"लेकिन यह college life फिर वापस नही आयेगी, और हाँ हम लोग तो कभी अलग नही होंगे, इस college में मेरे साथ हुई इकलौती अच्छी चीज़ हो तुम।"
"मैं चीज़ हूँ?"
"अच्छी नही सुनाई दिया, बस चीज़ सुना।"
उनकी बात चल ही रही थी कि आबिद भी वहीं पर आ गया और बोला, "अरे हमारे बिना क्या बाते चल रही हैं?"
"कुछ नही बस senty हुआ जा रहा है।" चेतना बोली।
मार्टिन ने भी आबिद की बात का जवाब देते हुए कहा, "यह महारानी senty हो रही हैं, मैं तो chill हूँ क्योंकि मुझे पता है हम लोग college के बाद भी ऐसे ही रहेंगे जैसे यहाँ हैं और हाँ एक बात बताना थी तुम लोगो को, मैने और साक्षी ने सोचा है कि masters भी साथ में करेंगे एक ही college से।"
"ओहो, love birds एक साथ ही उड़ने वाले हैं, चलो बड़िया।" आबिद बोला।
"तुम उसी की दुम बने रहना, मुझे तो पसंद नही है वो लड़की।" चेतना बोली।
मार्टिन ने चेतना को जवाब दिया, "हाँ बनूँगा दुम क्योंकि मैं उससे प्यार करता हूँ, तुम जलो मत तुम्हे भी मिल जायगा कोई।"
"मैं जल नही रही हूँ।"
"हाँ वो दिख रहा है।"
वो दोनो लड़ना शुरू करते उससे पहले ही उन्हे आबिद ने टोका, "अच्छा सुनो, यहाँ तो अब कुछ बचा नही है तो मैं तो चल रहा हूँ, घर पर भी कुछ काम है, Okay, फिर मिलेंगे।"
आबिद दोनो से अलविदा कहकर निकल गया, और वो लोग बातो में मस्त हो गए। मार्टिन ने चेतना को बताया, "काम तो मेरे घर भी है कुछ, मम्मी-पापा ने कहा था कि हो सके तो जल्दी आ जाना पर मैने मना कर दिया क्योंकि मेरे लिए मेरे दोस्त बहुत Important है, और खास तौर पर ऐसे दिन।"
"अरे पर कोई ज़रूरी काम है तो तुम्हे जल्दी चले जाना चाहिेए।"
"उनका काम कल भी हो जाएगा, Farewell रोज़-रोज़ थोड़ी होने वाली है।"
उसके बाद बारी-बारी उन दोनो ने वीर, रवि, ध्रुव, अमर, सना, रीना और class के हर एक students से बात करी। वो लोग dance कर रहे थे जब मार्टिन के पास साक्षी का message आया, "college building की terrace पर आ जाओ, एक surprise है तुम्हारे लिए, किसी को बताना मत, अकेले आना।" मार्टिन बिना किसी से कुछ कहे भागता हुआ terrace पर पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर उसे साक्षी तो नही दिखी पर आबिद मिला, उसने आबिद से हैरानी से पूछा, "तुम यहाँ? तुम तो चले गए थे।"
"हाँ गया था पर तुम्हारे लिए वापस आ गया।"
"मेरे लिए? क्यों क्या हुआ? और वो message तुमने किया था साक्षी के phone से?"
"हाँ मैने ही किया था तुम्हे बुलाने के लिए।"
"बताओ क्या हुआ?"
"कुछ खास नही बस तुमसे कुछ Confess करना था।"
"अरे यार ऐसे suspense create करके डरा क्यों रहे हो? जल्दी बताओ क्या बात है?"
"इसमें कोई शक नही कि मैं तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ, तुम मेरे best friend हो, लेकिन तुम्हे जैसे पता है कि मैं class का topper हूँ पर मुझे class में जो attention मिलनी चाहिए थी वो आज तक नही मिल पाया, क्यों? क्योंकि तुम जो मौजूद थे। सबका attention इन तीन साल सिर्फ तुम पर रहा, आबिद ने top किया OK, पर वो देखो मार्टिन ने कितना अच्छा joke मारा है।"
"अरे यार, यह सब क्या बोल रहा है तू, अब इसमे मेरी तो कोई गलती नही है, और अगर मुझे पता होता कि तुझे इस बात से दिक्कत है तो मैं side हो जाता।"
"हो ही ना जाते, छोड़ो मियाँ।"
"आज तक तुमने कुछ नही कहा तो आज अचानक से क्या हो गया।"
"मैं बस चाहता था कि तुम्हे मरने से पहले पता हो कि तुम क्यों मर रहे हो?"
"क्या?"
मार्टिन ने ध्यान नही दिया था कि वो लोग छत के बिल्कुल किनारे पर खड़े हुए थे। आबिद ने यह कहते हुए उसे अचानक से धक्का दे दिया कि, "It's your last day of being centre of attraction."
उस तीन मंज़िल की इमारत से गिरते वक्त मार्टिन का सिर एक छज्जे से टकराया और वो नीचे गिरने से पहले ही बेहोश हो गया। धम की आवाज़ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया, सब भागते हुए मार्टिन के पास पहुँचे, चेतना उसे देखते ही इतना घबरा गई कि वो कुछ पल केे लिए हिल ही नही पाई। किसी ने उसको हिलाकर कहा, "जल्दी Ambulance को Phone लगाओ।" सब घबरा चुके थे, नाचने-गाने वाला माहौल मातम में बदल चुका था, कुछ लोग छत पर देखने गए पर वहाँ उन्हे किसी का कोई सुराग नही मिला।
मार्टिन और उसके class वाले अस्पताल पहुँच चुके थे, चेतना ने मार्टिन के Parents, साक्षी और आबिद को भी बता दिया था तो वो भी वहीं आ गए थे। मार्टिन के माँ-बाप ने Police में भी report कर दी थी क्योंकि उन्हे यकीन नही हो रहा था कि उनका बेटा छत से यूँ गिर सकता है। उसकी माँ का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था, लेकिन मार्टिन को होश नही आया बल्कि वो सिर पर बहुत तेज़ चोट लगने की वजह से कोमा में चला गया।
उधर Police को भी सिर्फ इतना पता चला था कि मार्टिन के phone पर साक्षी का message आया था उसे छत पर बुलाने के लिए पर साक्षी ने बताया कि उसका Phone उसके bag से किसी ने या तो निकाल लिया था या गिर गया था और वो वही ढूंढ रही थी। दो teachers और उसके कुछ दोस्त इस बात के गवाह थे कि वो पूरे वक्त उनके साथ थी और आखिरकार उसका phone field में ऐसी जगह पड़ा मिला, जहाँ से वो गुज़री तक नही थी। इससे यह साबित हो गया था कि किसी ने साक्षी का phone चोरी कर के मार्टिन को छत पर बुलाया था, मगर वो कौन था यह पता नही चल पाया। Police ने साक्षी से पूछा, "तुम्हारे phone में password तो होगा, तो ऐसे कैसे हो सकता है कि एक अंजान इंसान phone को unlock कर के message कर दे?"
"password तो है पर वो सिर्फ नाम के लिए है क्योंकि मैं जितने भी लोगो से बात करती या मिलती हूँ सबको मेरा password पता है। और मेरा password 'MARTIN' है, जिसको नही भी पता है वो भी 1 minute में खोल सकता है।"
"वाह, तो रखा ही क्यों है। हद है बिल्कुल।"
College की CCTV Footage भी देखी गई पर उसका भी कोई फायदा नही हुआ क्योंकि Cameras सिर्फ Corridors में थे और उसमे सिर्फ मार्टिन ही दिख रहा था। Phone पर कोई fingerprint भी नही मिले, Police समझ नही पा रही था कि यह कौन है जो इतनी आसानी से एक इंसान को छत से धक्का देकर गायब हो गया।
मार्टिन की माँ साक्षी को ही बुरा भला कह रही थी, उनका मानना था कि साक्षी ने ही उनके बेटे की यह हालत करी है। चेतना के भी समझ नही आ रहा था कि यह कौन कर सकता है, क्योंकि मार्टिन तो सबसे मिल कर रहता था और उसकी कभी किसी से कोई लड़ाई नही हुई थी।
चेतना ने सिमरन को समझाते हुए कहा, "आप फिक्र ना करिए Aunty, मार्टिन को जल्दी होश आ जाएगा, और फिर वो इंसान भी पकड़ा जाएगा जिसने यह बेहूदा काम किया है।"
"मुझे कुछ समझ नही आ रहा मैं क्या करूँ, मैने कहा था इससे कि आज मत जा, लेकिन अपनी माँ की तो सुननी ही नही है।"
"जी वो बता रहा था कोई काम है घर पर, लेकिन वो आ गया।"
"काम क्या, बस Doctor के पास जाना था check-up के लिए, वहीं ले जाना था इसे भी।"
"सब ठीक तो है ना?" 
"क्या बताऊँ बेटा, Breast Cancer हो गया है मुझे, यही बात बतानी थी इसे, समझ नही आ रहा था कैसे बताए। पर अब क्या ही कहें।"
"अरे I am so sorry Aunty, कैसे ...I mean कब?"
"Symptoms तो एक महीने से मालूम पड़ रहे थे, मैं Ignore कर रही थी। फिर पिछले हफ्ते जब doctor को दिखाया और उन्होने diagnosis किया तो पता चला, वही सोचा कि इसे भी बता दें।"
"अरे Aunty, आप अपना ख्याल रखिये।"
"अब मुझे अपना कोई ख्याल नही है, बस God मेरे बच्चे को ठीक कर दे, चाहे मेरी जान लेले।"
"ऐसा ना कहिए Aunty, आप दोनो ही जल्दी ठीक हो जाएँगे। मैं Pray करूँगी।"
दो हफ्ते गुज़र चुके थे और मार्टिन की इस हालत के ज़िम्मेदार का कोई पता नही चल पाया था। आबिद ने यह काम इतनी समझदारी से किया कि पीछे एक भी सबूत नही छूठा था। उधर मार्टिन Coma से बाहर नही आया था, उसके माँ-बाप की हालत भी दिन प्रति दिन खराब होती जा रही थी। उसके पापा खुद इतनी जानकारी रखते थे कि उनको मालूम था कि कोमा में जाने के दो हफ्ते बाद इंसान के बचने का Chance सिर्फ 2-3% रह जाता है। यह बात दोनो को अंदर से खाये जा रही थी।
Class का हर बच्चा और Teachers Hospital आकर मार्टिन को कम से कम 3-4 बार तो देख चुके थे। चेतना और आबिद तो रोज़ शाम को आया करते थे और उसके माँ-बाप से बहुत देर बाते करते थे। दिन गुज़रने लगे और लोगो का आना कम होने लगा, अब चेतना और आबिद रोज़ नही आ पा रहे थे।
एक महीना हो गया, मार्टिन बस एक ज़िंदा लाश बनकर रह गया था, उसका दिमाग़ लगभग पूरी तरह बंद था और हाथ-पैरो में कोई हरकत नही थी। उसके लिए यह मुश्किल वक्त था, मगर उससे ज़्यादा उसके माँ-बाप के लिए मुश्किल था क्योंकि अपने हर वक्त उछलते-कूदते रहने वाले बच्चे को इस तरह पड़ा देखकर उनका कलेजा मुँह को आ रहा था। वहाँ College में Final exams शुरू हो गए, आबिद ने Hospital आना बंद कर दिया। चेतना भी रोज़ नही आ पा रही थी।
College पूरा होते ही आबिद का दिल्ली में एक Company में Placement हो गया और चेतना तो बनारस की थी तो उसे घर वापस जाना पड़ा। अब Hosptial मेें मार्टिन को देखने वाले सिर्फ अक्षय और सिमरन ही रह गए। हालांकि वीर और अमर 1-2 बार उसे देखने आ गए जबकि वो मार्टिन के दोस्त भी नही थे।
तीन महीने गुज़र चुके थे और मार्टिन के ठीक होने की उम्मीद कम होती जा रही थी। दूसरी तरफ सिमरन का Breast Cancer भी बढ़ता जा रहा था, उसको अपने Cancer का पता पहली Stage में ही चल गया था लेकिन मार्टिन की हालत की वजह उसने लापरवाही करी और cancer दूसरी Stage तक पहुँच गया। अब अक्षय ने ज़बरदस्ती सिमरन का इलाज कराया। इस दौरान अक्षय को बहुत मुश्किलो का सामना करना पड़ा, एक तरफ office और दूसरी तरफ बीवी-बच्चे का यह हाल manage करना बहुत मुश्किल हो गया था। लगभग 6 महीने लगे पूरे Treatment में और आखिर Operation कर के breast की गाँठ निकाल दी गई।
सिमरन ठीक हो चुकी थी लेकिन उसे इस बात की ज़रा भी खुशी नही थी क्योंकि उसे सिर्फ मार्टिन की फिक्र थी और उसके हाल में तो बिल्कुल सुधार नही आया था। Christmas और New year भी सूने निकल गये, और मार्टिन को Coma में गए एक साल हो गया।
एक साल हो जाने के बाद Doctors ने भी हाथ खड़े कर दिए और उन दोनो से कहा कि मार्टिन को घर ले जाएँ और वही उसका ख्याल रखे क्योंकि अब अगर इसे होश आता है तो वो कोई Miracle ही होगा। मार्टिन को Doctor की सलाह पर घर ले आया गया, उसके लिए एक Nurse को Hire किया गया था पर घर आकर अक्षय और सिमरन का काम थोड़ा ज़्यादा बढ़ गया था। चेतना सिमरन को Phone करती रहती थी पर अब उसका Phone आना भी कम हो गया था, शायद उसने भी अब मार्टिन के ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी।
इन ही तकलीफो, मुश्किलो और परेशानियों से लड़ते हुए 4 साल निकल गये, 2019 आ चुका था और अब अक्षय और सिमरन कभी-कभी रोते-रोते कह देते थे कि, "इससे अच्छा तो God इसे उठा ही ले, जाने क्या किस्मत लिखी है उसने इसकी।" हालांकि यह कहते ही दोनो खुद पर मलामत भी करने लगते थे कि वो ऐसा क्यों बोल रहे हैं। पिछले दो साल से ना कोई मार्टिन को देखने आया था और ना किसी ने मार्टिन के लिए Call करी थी, चेतना ने भी नही। बस कुछ रिश्तेदार या मोहल्ले वाले जो आते थे वो हाल पूछ लेते थे, वरना College के तो जैसे सारे ही लोग भूल चुके थे कि कोई मार्टिन भी है।
फिर आया 2019 का नवम्बर का महीना, एक दिन अक्षय मार्टिन के सिरहाने बैठा एक किताब पढ़ रहा था और सिमरन खाना बना रही थी कि अचानक मार्टिन की तेज़ साँसे चलने लगी, अक्षय ने देखा तो वो घबरा गया उसने फौरन सिमरन को बुलाया। Nurse भी देख रही थी पर वो कुछ समझ पाती उससे पहले ही अचानक मार्टिन की आँखे खुल गईं, वो चारो तरफ देखने लगा और बोलने की कोशिश करने लगा पर उसके मुँह से एक भी शब्द नही निकला, उसने उठने की भी कोशिश की पर उठ भी नही सका। अगर यह कोई Indian Serial होता तो शायद मार्टिन जागते ही चलने भी लगता और आबिद ने जो किया वो सबको बता भी देता, पर अफसोस यह असल ज़िंदगी है और यहाँ ऐसा नही होता।
अक्षय और सिमरन की खुशी का ठिकाना नही रहा पर खुशी को Side करते हुए पहले वो लोग उसे लेकर फौरन अस्पताल गए। खुशी इतनी थी सिमरन और अक्षय दोनो रो रहे थे, इंसान भी कितना अजीब है कि चाहे बहुत दुखी हो या बहुत खुश, बस रोता ही है।
अस्पताल में मार्टिन का Check up किया गया और Doctor ने उससे पूछा, "आपका नाम क्या है?"
वो कुछ नही बोला, Doctor ने फिर पूछा, "आपको पता है आपके साथ क्या हुआ था?
वो फिर कुछ नही बोला, Doctor ने इसी तरह कई सवाल और बाकी Check up किया और बताया, "मार्टिन के इतने ज़्यादा वक्त तक Coma में रहने की वजह से पूरी body की functioning रुक चुकी है, इसको पहले जैसा होने में काफी वक्त लग जाएगा, आप ऐसा समझ लीजिए कि आपको फिर से इसे सब चीज़े सिखानी पड़ेगी, शायद खाना-पीना और बोलना भी।"
"क्या इसको कुछ याद भी नही है?" अक्षय ने पूछा।
"2 हफ्ते बाद भी Coma से बाहर आने वाला इंसान confuse होता है, और मार्टिन तो फिर लगभग 4 साल से coma में था तो आप समझ सकते हैं।"
"कोई बात नही, Thanks to God कम से कम मेरा बेटा होश में तो आ गया, अब बाकी सब भी ठीक हो जाएगा।"
"हाँ आप खुद भी मेहनत करिए और मैं कुछ therapies बता दूँगा, वो करवाना, ऊपर वाले ने चाहा तो कुछ महीने में सब अच्छा हो जाएगा।"
मार्टिन के माँ-बाप ने उसके Coma से वापस आने के बारे में सिर्फ कुछ रिश्तेदारो को ही बताया और किसी को नही खासतौर पर मार्टिन के college के तो किसी शख्स को भी नही क्योंकि उनमे से किसी ने पिछले दो साल से उसकी कोई खबर नही ली थी। मार्टिन अब Wheel-Chair पर आ गया था, उसके लिए यह दुनिया फिर से नई हो गई थी, वो हर चीज़ को ऐसे देख रहा था जैसे पहली बार देखी हो। अक्षय और सिमरन ने उसको ठीक करने में अपनी जान झोंक दी। Mental Stability के लिए उसे therapy लेनी पड़ी, और शरीर को ठीक करने के लिए बहुत कोशिश की गई, सब ठीक हुआ पर पैरो की माँसपेशियों ने जैसे अपनी सारी जान खो दी थी। अब उसका जीवन Wheel-Chair पर ही था।
करीब डेढ़ महीने बाद Christmas आया, इस वक्त तक मार्टिन का दिमाग़ काफी हद तक सही हो गया था और 4 साल बाद वो तीनो कोई त्योहार मना रहे थे। सिमरन ने मार्टिन का हाथ पकड़ते हुए नम आँखो के साथ कहा, "बेटा, मैंने ऐसे किसी दिन का पता है कितना इंतज़ार किया है, ऐसा लगता है जैसे सदियाँ गुज़र गईं जब हमने साथ बैठ कर बात की हो, खाना खाया हो, नाचे हो, गाये हों।"
मार्टिन का दिमाग़ जाने कहाँ था, वो बोला, "मेरे college के exams खत्म हो गए क्या?"
"मार्टिन, यह 2015 नही है।"
"तो क्या है?"
"2019"
"ऐसा कैसे हो सकता है, मुझे तो लगा जैसे मेैं कुछ समय के लिए ही Coma में था, चार साल कैसे हो गए?"
"चार साल ही हुए हैं बेटा, पर आप अपने दिमाग़ पर ज़ोर ना डालो, Doctor ने मना किया था ना, ज़्यादा नही सोचना है।"
"अगर चार साल हो गए हैं तो मेरे सारे दोस्त कहाँ हैं? लेकिन एक मिनट, मेरे दोस्त हैं कौन?"
"मत सोचो इतना सब, वो जो भी थे वो अपनी ज़िंदगी में Busy हैं उन्हे तुमसे कोई मतलब नही।"
"मेरे साथ यह सब क्यों हुआ है मम्मी?"
"यह तो किस्मत लिखने वाला जाने पर अब तुम ठीक हो रहे हो तो उसको Thanks बोलो।"
दिन गुज़रते गए, फरवरी आ गया और मार्टिन की हालत में धीरे-धीरे सुधार आता गया, एक दिन अक्षय उसे Regular Check-up के लिए अस्पताल ले गया। Check-up के बाद जब वो मार्टिन को लेकर चला तो अचानक से उसे Doctor ने किसी काम के लिए बुला लिया। अक्षय ने Wheel-Chair को वहीं पर रोका और Doctor से बात करने चला गया। मार्टिन अपने पापा का इंतज़ार करने लगा, तभी उसकी नज़र एक Ward में एक Bed पर पड़ी तो उस पर लेटा इंसान उसे जाना पहचाना लगा। उसने दिमाग़ पर काफी ज़ोर डाला तो एक झटके के साथ उसे याद आया कि वो आबिद है और आबिद को पहचानते ही उसे यह भी याद आ गया कि उसी ने उसे छत से धक्का दिया था। वो फौरन अपने पापा को यह बताना चाहता था पर वो तो Doctor से बात करने गए थे।
आबिद के पास कोई और भी बैठा था, उसकी मार्टिन की तरफ पीठ थी पर जब वो घूमा तो मार्टिन ने उसे भी पहचान लिया, वो शिराज़ था। मार्टिन से इंतज़ार नही हो रहा था, वो बस चाहता था कि अक्षय आ जाए और वो उसे सब बता दे लेकिन उससे पहले उधर आबिद के पास Doctor और उसके बाकी जानने वाले पहुँच गए थे, उसकी साँस फूलने लगी थी, देखते ही देखते आबिद की साँसे रुक गई। सबका मुँह खुला का खुला रह गया।
अक्षय आया और 'Sorry बेटा' बोलते हुए Wheel-chair लेकर चल दिया, मार्टिन ने उसे रोकते हुए हड़बड़ाहट में कहा, "पापा वो देखो वो आबिद है उसने ही..."
अक्षय उसकी बात काटते हुए बोला, "बेटा, उसे जब तुमसे कोई मतलब नही तो तुम क्यों उससे मिलना चाहते हो?"
"नही मिलना नही, उसने ही मुझे छत से धक्का दिया था।"
"क्या? सच में? तुम्हे याद आ गया?"
"हाँ अभी इसको देख कर ही याद आया"
"Thank God, अब तुम बस Police को यह बता देना, बड़ी सज़ा दिलवाएँगे इस कमीने को, अभी यहाँ से चलते हैं उसने तुम्हे देख लिया तो Problem हो जाएगी।"
"पापा वो मर गया है शायद, लग तो ऐसा ही रहा है, आप करीब जाकर देख लो।"
अक्षय ने करीब जाकर देखा, वो सचमुच मर चुका था। अक्षय को उसके मरने की बहुत खुशी हुई, उसने मार्टिन को भी यह खुशखबरी सुनाई और घर के लिए चल दिया। दोनो को अंदर ही अंदर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था, एक सुकून सा था दोनो के दिल में कि अपने गुनहगार को उन्होने अपनी आँखो के सामने मरते हुए देख लिया। वो दोनो अस्पताल के Main Gate पर पहुँचे तो उन्होने सुना कि एक Doctor चिल्ला रहा था, "वो मोहित पाल नाम का जो Patient Admit हुआ था उसकी Corona Report positive आयी है और तुम लोग ने उसे Gerenal Ward में रख दिया, ज़रा सा भी दिमाग़ है या नही, अस्पताल बंद करवाओगे यार तुम लोग किसी दिन।"
मार्टिन को यह नाम सुना-सुना सा लगा पर वो समझ नही पाया, और अक्षय रुका भी नही जो उसे और कुछ सुनने का मौका मिलता। घर पहुँच कर उसे याद आया कि यह तो college में उसके teacher का नाम था, लेकिन उसे यह पक्का नही पता था कि यह वही मोहित पाल थे या कोई और, इसके अलावा वो आबिद की बाते याद कर करके भी परेशान सा हो रहा था।
अगले दिन मार्टिन ने चेतना को Call लगाई, किस्मत की बात थी कि चेतना का आज भी वही Number था जो 2015 में था, call लग गई। चेतना मार्टिन की आवाज़ सुनकर पागल सी हो गई, उसे यकीन नही हो रहा था कि वो मार्टिन ही बोल रहा है। काफी देर बात हुई, मार्टिन ने उसे आबिद और मोहित सर के बारे में बताया और चेतना ने उसे बताया कि उसकी शादी तय हो गई है, शायद 2021 में हो जाएगी। चेतना ने यह भी बताया कि वो अब call इसलिए नही करती थी क्येंकि वो मार्टिन के मम्मी-पापा से एक ही सवाल पूछ-पूछ कर थक चुकी थी। आखिर में चेतना ने कहा, "अच्छा सुनो, अभी तो यह corona virus की वजह से मिलना मुश्किल है पर एक Reunion plan की जा रही है, जब यह virus थोड़ा कम हो जाए तो मिलना होगा, आओगे?"
"ज़रूर यार, मेरा तो कितना मन है घूमने का, हर जगह देखना का, पर एक तो यह Wheel-chair और दूसरा यह virus, God ने भी क्या timing रखी मुझे ठीक करने की जब दुनिया के हालात खराब हो रहे हैं।"
"अरे ऐसा मत बोल, तू ठीक हो गया यही बहुत है, तुझे पता नही मैने कितनी Pray करी है, जब हालात सही होगें तो मिलेंगे OK."
दो चार बाते और हुईं और Phone रख दिया गया। मार्टिन चेतना से बात करके बहुत खुश था, अब वो बस सबसे मिलना चाहता था। लेकिन किस्मत को कोई चीज़ इतनी आसानी से मंज़ूर हो जाए तो बात ही क्या है। Corona Virus बढ़ता चला गया, मार्च में पूरे देश में Lockdown हो गया, सब दुआ करते रहे पर हालात नही बदले। यह वक्त सबके लिए बहुत मुसीबत भरा था, सबकी Mental condition बिगड़ने लगी थी पर मार्टिन के लिए चार गुना ज़्यादा मुसीबत थी क्योंकि वो चार साल बाद coma से जागा था। उसका दुनिया को देखना, समझना, हर चीज़ को दोबारा अनुभव करना बहुत ज़रूरी था लेकिन उसे भी घर में बंद रहना पड़ा। एक दिन उसने हिम्मत करके साक्षी को भी Call करी पर उसका Number शायद बदल चुका था इसलिए किसी और ने ही phone उठाया।
6 महीने ऐसे ही गुज़र गए, इस दौरान उसकी चेतना से बात होती रही, और जब दूसरो को पता चला तो उन लोगो ने भी उससे बात करी। अब मार्टिन Wheel-chair से बैसाखी पर  आ गया था, एक दिन उसने अपने मम्मी-पापा से कहा, "2020 बहुत बुरा साल है, किसी से मिल नही सकते, कहीं जा नही सकते, मेरा तो दिमाग़ खराब हो गया है।"
अक्षय ने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा, "नही बेटा, ऐसा ना कहो, हमारे लिए 2020 तो बहुत अच्छा साल है क्योंकि तुम हमारे साथ बैठे बात कर रहे हो। बुरे साल तो 2015 से लेकर 2019 तक थे, जब तुम ..." सिमरन ने अक्षय को एकदम से चुप करा दिया।
इतने महीनो में अक्षय और सिमरन ने कभी भी मार्टिन से यह नही कहा कि उन्हे इन सालो में कितनी परेशानी हुई बल्कि सिर्फ यह बताया कि वो उसकी कितनी फिक्र करते थे और ठीक होने के लिए Pray करते रहते थे। माँ-बाप भी अजीब होते हैं, वो आपको कभी यह नही बताएँगे कि उन्होने आपके लिए कितनी परेशानियाँ उठाईं हैं, वो तो बस आपको हमेशा ज़िंदगी का सकारात्मक नज़रिया देते रहेंगे, और हम समझदार होकर भी उनकी मुश्किलो को कभी नही समझ पाते। सितंबर आ चुका था और अब Lockdown खुल गया था, Reunion की बाते फिर से ज़ोर पकड़ने लगी थी। आखिर तय हुआ कि 10 सितंबर को Mall में सबको आना है, लगभग 5 साल बाद सब मिलने वाले थे।
मार्टिन के माँ-बाप उसे मना कर रहे थे पर वो हर हाल में जाना चाहता था। अक्षय ने कहा, "बेटा, एक तो तेरा यह हाल, दूसरा आज ज़रा कुछ काम भी है, अगर तू ना जाए तो सही रहेगा।"
"आपको पता है इतने वक्त बाद सबसे मिलने का plan बना है, और मेरा हाल ठीक है, मैं चला जाऊँगा"
"पर"
"पर क्या, आप क्या चाहते हैं मैं घर में ही बैठा रहूँ, पहले वो Coma फिर यह Corona Virus, मैं थक गया हूँ।"
मार्टिन की आवाज़ रुआँसी हो गई।
"चलो ठीक है अच्छा, हो आओ, काम फिर हो जाएगा।"
अक्षय उसे Cab में बिठा आया। सिमरन बोली, "आपने उसे बताया क्यों नही कि आपको Stone हो गई है और उसका Operation कराना है।"
"तुमने सुना नही उसने क्या बोला। उसे हो आने दो, मेरा operation तो वैसे भी कल है, आज तो बस Doctor से मिलने जाना है।"
"फिर भी"
"क्या फिर भी, तुम्हे Cancer हुआ था तुम बता पाईँ थी? नही ना।"
दोनो चुप हो गए, और मार्टिन के जाने के ज़रा देर बाद वो दोनो भी Doctor से मिलने चले गए।

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