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यह एक Series की आठवीं (आखिरी) कहानी है, इसको समझने के लिए आपको कम से कम साँतवी कहानी (नकारात्मक) पढ़नी पड़ेगी। यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।


एक दिन एक शिराज़ नाम का Angel God के पास आया और बोला, "मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ"
"पूछो"
"आपने यह जो इंसानो की दुनिया बनाई है, इसमे जो कुछ भी होता है सब आपने ही लिखा है, वो जो भी करते हैं अच्छा हो या बुरा सब आपकी मर्ज़ी से होता है।"
"हाँ तो?"
"तो क्या आप मुझे इजाज़त दे सकते हैं कि मैं भी कुछ लोगो की कहानी लिखूँ?"
"तुम क्यों लिखना चाहते हो?"
"बस मैं देखना चाहता हूँ कि मैं कैसी कहानी लिखूँगा और वो आपको पसंद आयेगी या नही। मैं कुछ भी अजीब नही करूँगा, वादा।"
"पर मैं तो सबकी किस्मत पहले ही लिख चुका हूँ।"
"आप तो God हैं, आप तो कुछ भी कर सकते हैं, एक मौका दे दीजिए ना।"
"बात तो तुम्हारी सही है। चलो ठीक है, जाओ दी इजाज़त।"
शिराज़ की बात God ने मान ली और उसे एक अनगिनत पन्नो की खाली किताब दी जिसमे में वो जो भी लिखेगा वो सच होगा। उसके साथ एक कलम भी दिया जिसकी स्याही कभी ना खत्म होने वाली थी। किताब लेकर शिराज़ बोला, "बहुत-बहुत शुक्रिया, मैं बस एक बात और कहना चाहता हूँ कि मैं उन लोगो के बीच में जाकर ही उनकी कहानियाँ लिखना चाहता हूँ, उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बनना चाहता हूँ। आप बस मुझे धरती पर भेज दो, आगे का मैं खुद देख लूँगा। वादा करता हूँ आपको शिकायत का मौका नही दूँगा।"
God ने उसकी यह बात भी मान ली और उससे यह कह कर धरती पर भेज दिया कि, "इस किताब का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी से करना और इसको सम्भाल कर रखना, यह किसी और के हाथ ना लगे।"
साल था 1993, जब शिराज़ धरती पर आया, उसने 1993-94 में अलग-अलग जगह पैदा हुए कुछ बच्चो को चुना। शुरूआत में उसने God की लिखी किस्मत में सिर्फ ऐसे बदलाव किये जिससे वो सब लोग एक जगह आकर मिले। और यह हुआ 2012 में जब उन सबने एक University में BBA करने के लिए Addmission लिया। फिर यहाँ से उसने उनकी कहानी की कमान पूरी तरह अपनो हाथ में ले ली। वही वक्त था जब वो भी उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया, उसने खुद को उन लोगो की उम्र का बनाकर उनकी Class में Admission ले लिया। अब सब लोग एक साथ थे और सबकी कहाँनिया एक दूसरे से जुड़ने लगी थी।
जब College शुरू हुआ था तो शिराज़ ने देखा कि उनके एक Teacher मोहित भी बच्चो की ज़िंदगी में काफी दखलअंदाज़ी कर रहे हैं तो शिराज़ ने उनकी कहानी भी बच्चो की कहानी के मुताबिक ढाल दी। College के तीन साल पूरे होने के बाद मोहित चीन चला गया और बच्चे अपनी-अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हो गये।
शिराज़ ने सब सोच रखा था कि उसे उन लोगो के साथ क्या करना है, वो यह सारी कहानियाँ फरवरी 2020 में पूरी करने वाला था। मगर उस वक्त God ने एक Virus धरती पर भेज दिया जिस वजह लगभग पूरी दुनिया बंद हो गई। उसे भी अपनी कहानियों को सितम्बर तक खीँचना पड़ा। फिर आखिर सितम्बर में वो वक्त आया जिसे उसका इंतेज़ार था।
10 सितम्बर को उन लोगो के Class की Reunion थी। रवि और आबिद तो मर ही चुके थे, बाकी ज़िंदा लोगो की भी ज़िंदगी कोई बहुत अच्छी नही चल रही थी। ध्रुव ने शादी नही की थी तो उसे लग रहा था कि सब उसे Judge करेंगे। वीर Gamophobia की वजह से शादी नही कर पाया था और यह बात सबको पता भी थी फिर भी वीर के दिल में अजीब सी झिझक थी। मार्टिन की हालत Coma से उठने के बाद से बहुत अच्छी नही थी। चेतना बनारस की थी और उसके घर वाले नही चाहते थे कि वो ऐसे माहौल में दूसरे शहर जाए। अमर, नेहा, सीमा और रीना अपनी Job जाने से परेशान थे पर वो आने के लिए उत्सुक भी थे। उधर मारिया और सना की शादी हो चुकी थी और वो दोनो ही अपने पति से Reunion में जाने के लिए इजाज़त नही ले पा रही थी। सबकी अपनी-अपनी परेशानी थी पर शिराज़ ने सबकी कहानी इस तरह लिखी कि सब लोग Reunion में आ जाएँ। सबको बुलाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था क्योंकि उसने उस दिन के लिए कुछ बहुत बड़ा सोच रखा था।
10 सितम्बर आ गया, शिराज़ के चेहरे पर उस दिन एक ऐसी मुस्कान बनी हुई थी जैसे आज वो दुनिया फतह करने जा रहा हो। उसने किताब और कलम उठाया और Mall जाने के लिए निकल गया, 11 बजे का वक्त तय हुआ था पर वो 10 मिनट पहले ही पहुँच गया। वक्त से पहले पहुँचने के बावजूद भी मार्टिन उसको वहाँ मौजूद दिखा, जब वो वहाँ पहुँचा तो मार्टिन Escalator पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था पर बैसाखियों की वजह चढ़ नही पा रहा था। तभी एक बंदा मार्टिन के पास दौड़ते हुए आया और उससे Lift का इस्तेमाल करने को कहा।
शिराज़ ने मुड़कर देखा तो कुछ दूरी पर ध्रुव भी अपने बेटे विक्की के साथ आ रहा था। वो ध्रुव के लिए रुक गया, जब ध्रुव आया तो शिराज़ ने उसका हाल-चाल लिया। ध्रुव शिराज़ को देख कर हैरान था क्योंकि Class में शिराज़ किसी से बात नही करता था और college पूरा होने के बाद भी उसने किसी से Contact नही रखा था। ध्रुव तो यह सोच रहा था कि इसे बताया किसने की आज यहाँ Reunion है।
ध्रुव ने उसे बताया कि उसकी अमर से बात हुई, अमर और वीर दोनो पहुँच चुके हैं, Food court में बैठे हैं। यह सुनकर शिराज़ ने food court चलने को कहा और तीनो लोग चल दिए। Escalator पर आगे शिराज़ था और उसके पीछे ध्रुव विक्की का हाथ पकड़े खड़ा था। अचानक से विक्की चिल्लाया, "पहले मैं जाऊँगा।" इतना कह कर उसने ध्रुव से हाथ छुडा़या और आगे बढ़ने लगा, वो शिराज़ को एक कोहनी मारता हुआ आगे निकल गया। उसकी कोहनी लगने से शिराज़ के हाथ से किताब और कलम छूट गया। गिरते हुए किताब खुल गई और उसके किनारे Escalator की दो सीढ़ियों के बीच में जाने लगे। शिराज़ ने किताब को पकड़ने की कोशिश करी पर वो सीढियों के बीच में चलती चली गई, उसके हाथ आए सिर्फ कुछ फटे हुए पन्ने। शिराज़ का दिल धक से हो गया, उसने फौरन कलम को देखने के लिए नज़र घुमाई तो वो दो-तीन सीढ़ी नीचे पड़ा था मगर आधा।
शिराज़ पागलो की तरह कलम उठाने नीचे की ओर भागा, तब तक Escalator ऊपर भी पहुँच गया। शिराज़ का दिमाग़ काम नही कर रहा था, उसे यकीन नही हो रहा था कि जिस किताब को उसने 27 साल से इतनी हिफाज़त से रखा था, उसके इतनी आसानी से टुकड़े हो गए। शिराज़ की यह हालत देखकर ध्रुव बोला, "अरे इतना क्या परेशान हो रहे हो, एक Diary और pen ही तो था, और यार आज के time में Diary लेकर कौन घूमता है।"
"तुम मुझे समझा रहे हो, उसे समझाओ ना कि ढ़ग से चला करे।"
"किसे समझाऊँ?"
"किसे क्या मतलब, विक्की को और किसे।"
"कौन विक्की?"
शिराज़ को बहुत गुस्सा आ रहा था, उसने झटके से विक्की की तरफ इशारा करते हुए कहा, "इस विक्की को, अपने बेट..." वो बात पूरी कर पाता उससे पहले ही उसका ध्यान गया कि विक्की वहाँ था ही नही। उसने ध्रुव से फिर कहा, "लो और आगे भाग गया वो, बिल्कुल Control नही है तुम्हे अपने बेटे पर।"
"कौन विक्की कौन बेटा, क्या बोले चले जा रहे हो? ठीक तो हो?"
"ठीक शायद तुम नही हो, अपने बेटे को भूल गए।"
"रागिनी अभी Pregnant है, मेरा कोई बेटा नही है। क्या हो गया है तुम्हे शिराज़?"
यह सुनकर शिराज़ बहुत ज़्यादा हैरान हो गया पर वो समझ  भी गया था कि किताब के टुकड़े हो गए इसलिए यह हो रहा है। वो अब भी गुस्सा था पर खुद को शांत करके बोला, "अरे Sorry sorry, मैने तुम्हे कोई और ही समझ लिया था, चलो कोई ना, छोड़, चलो food court चलते हैं।"
दोनो Food court पहुँचे तो मार्टिन वहाँ अकेला बैठा हुआ था, उन दोनो को देखते ही मार्टिन खड़ा हुआ और बारी-बारी दोनो से गले मिला। शिराज़ ने ध्यान दिया कि मार्टिन के पास कोई बैसाखी नही थी और वो आराम से खड़ा था। शिराज़ को यह सब देख कर बहुत गुस्सा आ रहा था, वो उसी वक्त God से पूछना चाहता था कि यह क्यों हुआ पर उसने यह देखने के लिए सब्र किया कि क्या-क्या बदला है।
तीनो बैठ गए और हाल-चाल लिए जाने लगे, तभी शिराज़ को याद आया कि ध्रुव ने कहा था कि अमर और वीर आ चुके हैं पर वो दोनो तो यहाँ नही हैं। शिराज़ समझ गया कि किताब की ही वजह से इसमें भी कुछ बदलाव हुए हैैं। बाते चल ही रहीं थी कि अचानक ध्रुव और मार्टिन Hi बोलते हुए खड़े हो गए। शिराज़ ने मुड़कर देखा तो वो वीर और सीमा थे, उन दोनो को साथ देख कर शिराज़ का मुँह बिगड़ गया। शिराज़ को अपनी कहानियों में हुए बदलाव बहुत गुस्सा दिला रहे थे। वो दोनो आकर बैठ गए, पता चला कि वीर और सीमा College के खत्म होने के बाद से गुरूग्राम में Live-in में रह रहे हैं। शिराज़ के अलावा सब बहुत खुश थे। वीर बोला, "यार शिराज़ तुम तो बिल्कुल भी नही बदले जैसे College में लगते थे आज भी वैसे ही हो़"
"हाँ बस ऊपर वाले का करम है और तुम सुनाओ सब ठीक, तुम्हारा दोस्त अमर कहाँ है? वो नही आ रहा?"
वीर कुछ बोलता उससे पहले ही किसी ने पीछे से शिराज़ की आँखे बंद कर दी। आवाज़ आयी, "पहचानो, पहचानो।"
उसने कहा, "अमर?"
उस इंसान ने फौरन शिराज़ के चेहरे को छोड़ दिया, शिराज़ उससे मिलने के लिए घूमा, उस शख्स ने अपना Mask हटाया, वो आबिद था। आबिद को देख कर शिराज़ के मुँह से बेसाख्ता निकल पड़ा, "तुम?"
"क्यों मैं नही आ सकता क्या और ऐसे क्यों चौक रहे हो जैसे कोई भूत देख लिया हो।"
"नही बस वो मुझे लगा कि अमर है।"
उसकी यह बात सुनकर वीर बोला, "कैसी बात कर रहे हो यार।"
"क्यों क्या हुआ?"
"यार It's not funny."
"क्या? मैं समझ नही पा रहा हूँ।"
"तुम भूल गए हो या 5 सालो में इतने insensitive हो गए हो?"
"I am sorry, शायद भूल ही गया हूँ।"
"अमर ने Second Year में अपनी मुम्बई Trip के दौरान suicide कर ली थी, याद आया? मेरे तो समझ नही आ रहा इतना Tragic incident तुम भूल कैसे सकते हो?"
शिराज़ भौचक्का रह गया, उसके समझ नही आया कि क्या बोले, "I am so sorry, really very sorry, मैं पता नही भूल कैसे गया, Shit यार।"
वीर को गुस्सा आ रहा था इसलिए वो कुछ नही बोला। माहौल गरम हो गया था, पर मार्टिन ने अपनी मसालेदार बातो से सब ठीक कर लिया। मार्टिन ने आबिद से पूछा, "तूने तो अपना वादा निभा लिया, तू तो दिल्ली से आ गया पर वो Madam चेतना का क्या है, आयेगी या नही?"
"नही यार वो तो नही आ रही, उसके घर वालो ने आने नही दिया।"
"मुझे लगा ही था।"
शिराज़ कभी वीर और सीमा को देख रहा था कि जिन्हे उसने साथ नही होने दिया था वो साथ में कितने खुश हैं और कभी आबिद और मार्टिन को देख रहा था कि College के बाद आज भी उनकी दोस्ती वैसी की वैसी ही है। आबिद एक अच्छा इंसान है और मार्टिन के अंदर अब भी बचपना है। शिराज़ सबको देख रहा था और समझने की कोशिश कर रहा था। उसे लग रहा था कि अब इससे ज़्यादा और क्या ही अजीब हो सकता है कि तभी मार्टिन बोला, "and the त्रिदेवियाँ in the house."
शिराज़ को त्रिदेवियाँ शब्द सुनकर लगा कि रीना, सना और मारिया होंगी पर उसने देखा तो वो रीना, सना और गुलशन थीं। उसके समझ नही आया कि गुलशन इन दोनो के साथ है पर मारिया क्यों नही है। अब वो कुछ कहते भी डर रहा था कि कहीं मारिया के साथ भी कुछ हो तो नही गया। वो तीनो आकर सबसे मिली और बातचीत होने लगी। बहुत सोच समझकर शिराज़ बोला, "मारिया भी अगर आज हमारे साथ होती तो कितना अच्छा लगता।"
यह सुनकर रीना और मार्टिन दोनो साथ में बोले, "कौन?"
"अरे वो बुर्के वाली।"
"कौन बुर्के वाली? अपने यहाँ बुर्के वाली कौन थी?"
शिराज़ मारिया का नाम दोबारा लेते-लेते चुप गया क्योंकि वो समझ गया था कि मारिया अब यहाँ Exist ही नही करती। उसने बात बदलते हुए कहा, "अरे Sorry वो मेरे Masters में थी, मैं Confuse हो गया था।"
वीर बोला, "तुम कुछ ज़्यादा ही confuse लग रहे हो, क्या चक्कर है?"
"अरे कुछ नही यार, बस लगता है यद्दाश्त कमज़ोर हो गई है।"
"तो जाकर इलाज कराओ।"
सब लोग बाते कर रहे थे और शिराज़ अब रवि, नेहा और आयूष के बारे में सोच रहा था कि वो लोग ज़िंदा हैं या नही। बाते होती रही तो आयूष और नेहा का तो पता चल गया कि वो ज़िंदा हैं पर Reunion में नही आ रहे हैं लेकिन रवि का अभी कोई ज़िक्र नही आया था। रवि का ज़िक्र आने से पहले मोहित सर के बारे में बात होने लगी। सीमा बोली, "यार मोहित सर भी होते तो यह Reunion असल में पूरी हो जाती।"
सना ने उसका जवाब दिया, "हाँ पर वो तो college के बाद से ऐसे गायब हो गए कि पता ही नही कहाँ चले गए।"
यह सुनकर शिराज़ ने फौरन ध्रुव से पूछा, "अरे ध्रुव तुम्हारी बात हुई उनसे?"
"मेरी कहाँ से होगी जब किसी की नही हो रही तो।"
"अरे तो उन्होने जो Blog बनवाए थे वो लिखो, क्या पता वो Check कर ले तो बात हो जाएगी।"
"क्या बेवकूफी भरे Ideas दे रहे हो, और मुझे कोई इतना मतलब भी नही है, जिसे मतलब हो वो करे यह सब।"
उनकी बातो के बीच में रीना बोली, "एक इंसान है जिसे पता हो सकता है, मोहित सर का Favourite Student, रवि।"
रवि का नाम सुनकर शिराज़ एक दम बोला, "अरे हाँ रवि कहाँ हैं?"
"क्या पता कहाँ है, वो हम में से किसी के touch में नही है।"
"अजीब बात है यह दोनो गायब कहाँ हो गए।"
"अरे रवि से कोई मतलब भी नही है, College में भी उसने कहाँ किसी से ढ़ग से बात की, बल्कि बात करता भी था तो लोगो की चुगली ही करता था। लोगो को लड़वाने में मज़ा आता था उसे, अच्छा हुआ हम लोग यह बात समझ गए वरना आज यह Reunion नही हो रही होती, सब एक दूसरे से लड़े बैठे होते। मुझे मतलब तो मोहित सर से था यार, वो आते तो अच्छा रहता।"
"हाँ बात तो तुम्हारी सही है।"
शिराज़ को अब सबके बारे में पता चल चुका था, वो अचानक ऊपर देखता हुआ बहुत तेज़ गुस्से में चिल्लाया, "GOD!!!"
उसके आसपास एक दम सब कुछ थम गया, जो जैसा था वैसा ही मूर्ति बन कर रह गया, घड़ी 11:41:10 पर रुक गई, God की आवाज़ आयी, "बहुत वक्त बाद याद किया शिराज़, कैसे हो?"
"बहुत बुरा हूँ, आपने यह क्यों किया?"
"क्या किया?"
"27 साल से मैं इस दुनिया में हूँ, इस दिन का मैने कितना इंतज़ार किया था और आपने एक पल में सब बदल दिया।"
"मैंने कहाँ बदला? वो तो विक्की तुमसे टकराया और किताब सीढ़ियों में चली गई और यह तो तुमको पता ही था कि अगर किताब नष्ट होगी तो सब कुछ मेरी लिखी किस्मत जैसा हो जाएगा, तो तुम्हे उस किताब को सम्भाल कर रखना चाहिए था।"
"मैने वो हमेशा सम्भाल कर रखी थी पर आज यह आपने ही किया है।"
"इंसानो की दुनिया में रह कर इंसानो जैसी बाते करने लगे हो।"
"मुझे नही पता, आपने मेरी मेहनत पर पानी फेरा है, मुझे सब कुछ पहले जैसा चाहिए।"
"नही अब कुछ पहले जैसा नही होगा।"
"क्यों?"
"क्योंकि यही किस्मत है।"
"किसकी किस्मत, इन लोगो की?"
"नही, तुम्हारी।"
"मेरी?"
"तुम इस दुनिया में आए जहाँ सबकी कोई ना कोई कहानी होती है, किस्मत होती है। तुम इन लोगो की ज़िंदगी का हिस्सा भी बने, तुमने इन लोगो की किस्मत भी लिखी पर गलती यह करी कि अपनी नही लिखी। अब तुम्हारी किस्मत भी तो किसी को तो लिखनी ही थी ना तो वो मैने लिखी क्योंकि आखिर सबकी किस्मत लिखने का काम मेरा ही है। तुमने इस दुनिया में जो कुछ भी किया वो सब मेरा ही लिखा हुआ है।"
"इन सबकी कहानिया भी?"
"हाँ"
"तो फिर आपने मुझे लिखने ही क्यों दी, इसका क्या फायदा? और अगर यह आपकी ही लिखी हुई हैं तो फिर बदली क्यों?"
"अगर बदलता नही तो तुम्हे पता कैसे चलता कि जो तुम कर रहे हो वो मैं करा रहा हूँ।"
"मतलब मैने जो भी किया या लिखा वो सब आपने ही कराया?"
"सबसे मैं ही कराता हूँ, तुम कुछ अलग हो क्या।"
"तो अब क्या?"
"अब मुझे तुमको एक कहानी सुनानी है जो मैने यह इंसानो की दुनिया बनाने से भी पहले लिखी थी।"
"सुनाईए"
"God यानि कि मैने एक बार एक इंसानो की दुनिया बनाई, उस दुनिया के सारे लोगो की किस्मत मैंने लिखी थी पर एक दिन एक शिराज़ नाम का Angel मेरे पास आया और बोला कि वो कुछ लोगो की कहानी लिखना चाहता है तो मैंने उसे इजाज़त देदी। वो एक किताब और कलम लेकर दुनिया में चला गया और कुछ लोगो की किस्मत लिखने लगा पर उसे यह नही पता था कि उसकी किस्मत तो मेरे हाथ में है। उसने अपने आप को उन लोगो की ज़िंदगी का हिस्सा बना लिया था पर फिर भी उसने एक ऐसी कहानी लिखी जिसमे उसने अपने असली रूप को उन लोगो के सामने रखा और उसके लिए उसने एक समानांतर दुनिया ही बना डाली। धीरे-धीरे उसको अपनी लिखी कहानियों पर घमंड भी होने लगा तो मैने उन कहानियों का अंत होने से पहले किताब और कलम को नष्ट कर दिया, क्योंकि वो इंसानो के सामने अपने असली रूप में आकर और किताब में लिखकर उन्हे यह दिखाना चाहता था कि उनकी ज़िंदगी में जो भी हुआ या होता है वो कोई और ही लिखता है इसलिए एक दूसरे से नफरत ना करो। पर वो यह भूल गया था कि मैं कभी भी इंसानो को चमत्कारो से नही समझाता बल्कि उनके अनुभवो से सिखाता हूँ। किताब के नष्ट होने से सब कहानियां अपने असली रूप में बदल गई। फिर आखिर में मैने उस Angel को उसी की कहानी सुनाकर यह बताया कि सब कुछ लिखने और लिखवाने वाला केवल मैं हूँ।"
शिराज़ सन्न खड़ा सुन रहा था, उसे आज तक लग रहा था कि वो सबकी कहानी लिख रहा है पर वो यह जानकर हैरान रह गया था कि वो तो खुद एक कहानी का हिस्सा है।God आगे बोले, "वैसे आखिरी कहानी का नाम सही है ना, लेखक? हालांकि तुमको लगा कि वो तुम हो पर लेखक तो हमेशा से मैं ही था।"
"मैं क्या ही कहूँ, मेरे पास कुछ नही बचा कहने को, मैं तो यही सोचकर हैरान हूँ कि आपने मेरी कहानी इतना पहले ही लिख दी थी, मतलब जो हुआ वो सब होना ही था, और शायद हो ही रहा है।"
"अब यहाँ तुम्हारी कहानी खत्म होती है, यह Reunion पूरी करके यहाँ वापस आ जाना, वैसे भी तुम इंसानो की दुनिया में रहते-रहते बिल्कुल इंसानो जैसे हो गए हो। गुस्सा, घमंड, लोभ सब आ गया है तुम में, भूलो मत कि तुम एक Angel हो। "
"जी सही कहा आपने, ठीक है, मैं थोड़ी देर में आता हूँ।"
शिराज़ ने अंगड़ाई लेते हुए अपने हाथ ऊपर उठाए और अपने पंखो को पूरा खोल दिया। उसका गुस्सा शांत हो चुका था और वो अब बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। पंख समेटते ही वक्त चलने लगा, रीना झुंझलाते हुए बोली, "अरे क्या हो गया तुम्हे?"
"कुछ नही वो एक दम से पैर की नस चढ़ गई।"
"तो इतनी बुरी तरह 'GODD' कौन चिल्लाता है यार?"
"Sorry दर्द की वजह मुँह से निकल गया।"
"चलो, कोई ना।"
खाने की चीज़े मेज़ पर आ चुकी थी और इसी तरह बाते होती रहीं, कोई College की बात कर रहा था, कोई आने वाले कल की तो कोई किस्मत की। मार्टिन बोला, "वक्त कितनी जल्दी गुज़र जाता है पता ही नही चलता, ऐसा लगता है कल ही की बात है हम लोग class में बैठे थे।"
यह सुनकर आबिद बोला, "हाँ यार, ऐसा लगता है कि काश वो वक्त फिर से आ जाए।"
रीना बोली, "यार मैं तो खुश हूँ कि कम से कम हम लोग आज मिल तो पाए।"
सना ने कहा, "जो लोग नही आए उन्हे नही पता उन्होने क्या Miss कर दिया।"
गुलशन ने भी अपनी बात रखी, "जब मैं तुम लोग को साथ में देखती हूँ, Nostalgia hits me hard यार।"
सीमा वीर को देखते हुए बोली, "I know बहुत बुरी चीज़े भी हुई हैं, काश हम उन्हे बदल सकते पर मेरे साथ college में हुई सबसे अच्छी चीज़ वीर है।"
"अच्छा मैं चीज़ हूँ?"
"चीज़ सुनाई दिया अच्छी नही?"
"अरे मज़ाक कर रहा हूँ।"
शिराज़ को यह सुनकर अपनी लिखी कहानी याद आ गई पर उसने उस पर ध्यान ना देते हुए कहा, "I know मैं बहुत weird behave कर रहा हूँ आज पर I really missed you guys, and I'm gonna."
"कोई बात नही, हो जाता है कभी-कभी।" वीर ने जवाब दिया।
शिराज़ बिना किसी सोच और ख्याल के सबकी शक्ल बड़े गौर से देख रहा था तभी Food court में लगी हुई TV पर कोई अंजान शायर बोलने लगा,

"ज़िंदगी मिली थी जैसे कोरा कागज़,
जो चाहते वो लिखते,
क़लम मगर ना मिला,
लिखते तो कैसे लिखते,
लहू का मशवरा मिला लोगो से,
जान ही ना बचती तो क्या लिखते,
फिर भी हमने सोचा एक बार,
कि अगर हम लिखते तो क्या लिखते,
दुनिया जलती हमारी किस्मत से,
कुछ ऐसा ग़ज़ब लिखते,
जो अब तक ना मिला,
वो सब लिखते।"

शिराज़ को उस शायर की बात सुनकर हँसी आ गई लेकिन लोग थोड़ा भावुक हो रहे थे और फिर Reunion खत्म हो गई। शिराज़ वापस God के पास चला गया। God ने उससे पूछा, "तो कैसे रहे दुनिया के 27 साल?"
"बहुत अजीब, क्योंकि जैसा कि आपने कहा मैं इंसानो जैसा ही बन गया था। जब तक सब मेरे हिसाब से होता रहा  तो मैं खुश था पर जैसे ही आपने चीज़े बदली, मुझे आप पर गुस्सा आने लगा। यह दुनिया शायद जगह ही ऐसी है। पर एक बात समझ आ गई कि लेखक सिर्फ आप हो और कोई नही।"
God ने उसकी बात सुनकर उसे जाने को कह दिया और उधर दुनिया में सब लोग अपने दिल में खुशी और दुख का मिश्रण लिए अपने-अपने घर पहुँच चुके थे।





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