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अविवाहित

Disclaimer

यह एक series की पाँचवी कहानी है। Series होते हुए भी हर कहानी को अलग-अलग पढा जा सकता है पर इस कहानी में Series की पहली कहानी (दृष्टिकोण) के Spoilers हैं तो अगर आपने वो नही पढ़ी है तो उसको पहले पढ़ लें, तथा यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।
आमतौर पर लोग छोटी उम्र में जल्दी समझ नही पाते कि उन्हे आगे क्या करना है पर ध्रुव ने सब सोच रखा था और इसीलिए वो BBA करने एक college में आया था। पहले semester में उनके Teacher मोहित ने सब बच्चो को एक blog बनाने और लिखने के लिए कहा, मोहित का मानना था कि इंसान जो बोलकर नही कह पाता वो सब कुछ वो लिखकर कह लेता है। मोहित ने Blog बनवा तो सबके दिए पर उन्हे इस्तेमाल कुछ चुनिंदा लोगो ने ही किया। ध्रुव ने भी उसमे कुछ नही लिखा पर उसे पढ़ने का शौक था इसलिए वो दूसरे के Blogs देखता रहता था।
College में ध्रुव बात तो सबसे करता था पर उसका कोई भी खास दोस्त नही बन पाया। वो जब चौथे Semester में था तब उसको लगने लगा कि उसकी भी कोई Girlfriend होनी चाहिए। हाँलाकि यह सिर्फ Peer pressure था जिसको वो ज़रूरत समझ रहा था। उसने 3-4 लड़कियों को Propose किया पर सबने कोई ना कोई बेकार सा बहाना देकर मना कर दिया। उन लड़कियों में एक लड़की सीमा भी थी, सीमा का नाम अलग से लेना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वो इकलौती लड़की थी जिसने इंकार करने के बावजूद बाद में ध्रुव का proposal accept कर लिया था।
दूर से हर चीज़ कितनी अच्छी और आसान लगती है पर होती बिल्कुल नही, उनका रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था। ध्रुव ने सीमा का एक Blog पढ़ा जिसमे लिखा था कि उसने पहले वीर को Propose किया था पर वीर ने कोई भाव नही दिए इसलिए उसे सबक सिखाने के लिए उसने ध्रुव का proposal accept कर लिया।
ध्रुव को यह पढ़कर बहुत गुस्सा आया और उसका गुस्सा तब और ज़्यादा बढ़ गया जब उसने वीर का Blog पढ़ा जिसमे उसे पता चला कि वीर को Phobia है Commitment का और सीमा ने उसका साथ देने के बजाए ध्रुव को Boyfriend बना लिया।
सीमा ध्रुव के साथ बहुत अच्छे से रहती थी पर उसने ध्रुव को वीर के मामले में कुछ नही बताया बल्कि अपने Blog में बदलाव भी कर लिए ताकि ध्रुव को कुछ पता ना चले पर वो तो पहले ही पढ़ चुका था। अब ध्रुव का मन खराब हो चुका था, उसने सीमा से कहा तो कुछ नही पर थोड़े ही वक्त बाद उससे अलग हो गया।
ध्रुव मोहित से हर बात कर लेता था, उसने यह सब भी मोहित को बताया, तो मोहित ने उससे मज़ाक में कहा कि ऐसे हर किसी को Girlfriend बनाना छोड़कर उसे सीधे बीवी ढूँढनी चाहिए। ऐसी बातो का ध्रुव के पास सिर्फ एक ही जवाब होता था कि वो कभी शादी नही करेगा, उसे शादी में कोई Interest नही है। मोहित उसकी यह बात बस इतना कह कर काट देता था कि शुरू में सब यही कहते हैं पर कर सब लेते हैं।
College पूरा हो गया और ध्रुव अपनी ज़िंदगी में busy हो गया। मोहित भी उसी साल college छोड़कर कहीं चला गया, कहाँ गया यह किसी को पता नही था और ना ही किसी को मतलब था। लेकिन बहुत वक्त बाद फिर एक दिन ऐसा आया जब ध्रुव को अपने मोहित सर की याद आयी पर उनका तो कोई अता-पता नही था। किसी को नही मालूम था कि वो कहाँ गए, उनसे Contact करने का कोई भी ज़रिया नही था, ध्रुव को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे। फिर उसे याद आया कि मोहित सर को Blog लिखने और पढ़ने का बहुत शौक था तो उसने उनका Blog  check किया पर वहाँ भी कोई नई Post नही थी। उसने उन्हे E-Mail भी किए पर कोई जवाब नही आया। हर तरफ से हार मान लेने के बाद ध्रुव ने आखिरी तीर हवा में चलाया। उसने लगभग 7-8 साल पहले उनका बनवाया गया Blog खोला और लिखा।

                              #Polaris
                             
2 जनवरी 2020

मोहित Sir, मैं यह Blog आपके लिए लिख रहा हूँ। किसी भी तरीके से आपसे बात नही हो पाई, अब आपका बनवाया गया यह Blog ही एक आखिरी उम्मीद है। College खत्म हुए और आपको गए हुए लगभग साढ़े 4 साल हो गए हैं। आप कहाँ चले गए हैं? College में हम अपनी हर समस्या का हल आपसे पूछते थे और अब मैं एक असमंजस में हूँ पर आप यहाँ नही हैं। हाँ मैं मानता हूँ हम लोगो ने भी आपको college के बाद Contact नही किया, उसके लिए मैं माफी माँगता हूँ पर अगर आप मेरा यह Blog पढ़ रहे हैं तो Please मुझसे Contact करिए।
मुझे मालूम है आपको अपने Students का blog पढ़ना कितना पसंद था। अब मैं आपको बताता हूँ कि मेरी असमंजस की वजह क्या है, शायद उसे पढ़ कर ही आप मुझे माफ कर दें और मुझसे बात कर लें।
2015 में College पूरा हुआ तो मैने उसके बाद Masters नही किया बल्कि सीधे Footwear का Business शुरू किया, और वो एक अच्छा Idea रहा, Business चल गया। Business चलते ही घर वाले शादी की ज़िद करने लगे पर मैंने तो आपको college में ही बताया था ना कि मैं शादी नही करना चाहता था। आपको और सबको लगता था कि मैं यह यूँही कह रहा हूँ जैसे हर बच्चा Teenage में कह देता है, पर मेरा यह फैसला अटल था। मैने घर वालो की एक नही सुनी, शादी नही करनी थी, नही की। चार लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह तो कभी की ही नही थी।
मैं एक बच्चा Adopt कर के बस उसकी ज़िंदगी बनाने में अपनी ज़िंदगी लगाना चाहता था। Specifically कहूँ तो मैं एक लड़की पालना चाहता था, मगर हमारे देश का कानून एक कुँवारे लड़के को एक लड़की पालने की इजाज़त नही देता। आखिर मैंने एक लड़के को गोद लेने का फैसला किया।
Adoption के लिए मैं पूरी तरह तैयार था, Financially, mentally, physically हर तरीक से, सिर्फ मेरी उम्र कम थी। और फिर एक दिन यह कमी भी पूरी हो गई, फरवरी 2018 में मैं 25 साल का हो गया। मैने Birthday वाले दिन ही Adoption Agency में Apply कर दिया। मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे 6-7 महीने में ही बच्चा मिल भी गया। 7 साल का मेरा बेटा विक्रांत, बहुत ही प्यारा है वो, मै उसे प्यार ये विक्की बुलाता हूँ।
मेरे घर वाले मेरे फैसले के सामने झुक चुके हैं और रिश्तेदारो-दोस्तो को तो कभी मैने इतनी छूट ही नही दी कि वो कोई फालतू बात करे या ताना मार पाए क्योंकि अगर वो ऐसी-वैसी बात करने की कोशिश भी करे तो मैं उन लोगो को सही से सुना देता हूँ।
उसे घर लाए एक साल से ज़्यादा वक्त हो गया है। शुरूआत में वो थोड़ा uncomfortable था पर अब वो भी मुझे वैसे ही पसंद करने लगा है जैसा मैं उसे करता हूँ। उसका मुझे पापा कहना एक अलग ही तरह की खुशी देता है। 2nd class में पढ़ता है वो, पढाई में भी अच्छा है, मेरी तरह बुद्धु नही है। ऊपर वाले की कृपा से मैं जैसी चाहता था वैसी life जी रहा हूँ। मैं उसे कोई कमी नही होने देता, अपने हिसाब से मैं उसकी अच्छी परवरिश कर रहा हूँ।
एक दिन मैने सोचा New year पर विक्की को दिल्ली घुमा लाता हूँ, जब से आया है वो कहीं दूर घूमने नही गया। उससे  से पूछा तो वो भी राज़ी हो गया पर मैने Notice किया कि वो उतना खुश नही था जितना आमतौर पर होता है लेकिन मैं Packing करने के चक्कर में कुछ पूछना ही भूल गया। 30 दिसंबर को हम लोग दिल्ली के लिए चले, उसने रास्ते में मुझसे पूछा, "पापा मेरी मम्मी क्यों नही हैं?"
मैं उसके मुँह से यह वाक्य सुनकर एक मिनट के लिए तो सोच में पड़ गया कि इसने यह क्या पूछ लिया। पर अब मुझे जवाब तो देना ही था, मैं लोगो की बाते Ignore कर सकता था, उन्हे चुप करा सकता था, उनसे लड़ सकता था पर अपने बेटे को तो जवाब देना ही पड़ेगा ना इसको तो मैं चुप नही करा सकता। मैने कहा, "बेटा आप सिर्फ मेरे हो, मेरे विक्की, मैं आपको किसी से Share नही कर सकता इसलिए मम्मी नही हैं।"
"पर मेरे सारे दोस्तो की तो हैं, class में सब मुससे पूचते हैं कि तेरी मम्मी क्या करती हैं, मैं कैता हूँ वो नही हैं तो वो पूचते हैं क्यों नही है, मर गई क्या। सच्ची बताओ पापा मम्मी मर गई क्या?"
"अरे नही बेटा, आपकी मम्मी नही हैं सिर्फ पापा हैं, और आपके पापा आपको मम्मी-पापा दोनो का प्यार करते हैं, बल्कि दोनो से भी ज़्यादा, सबसे ज़्यादा।"
"नही पर सबकी तो होती है तो मेरी क्यों नही है?"
"बेटा तुम्हे मम्मी क्यों चाहिए, तुम्हे कोई कमी है तो बताओ?"
"मुझे पता है मम्मी क्यों नही हैं, क्योंकि आपने शादी नही की, शादी की होती तो मम्मी होती।"
मैं उसकी यह बात सुनकर चौंक गया कि कैसी बाते करने लगा यह अचानक। मैने पूछा, "अरे बेटा, तुमसे यह सब किसने कहा?"
"किसी ने भी नही, मुझे पता है सब लोग शादी करते हैं तभी 
सबके मम्मी और पापा दोनो होते हैं, आपने नही की इसलिए मेरे सिर्फ पापा ही हैं। आपने शादी क्यों नही की?"
मैं उसकी यह सारी बाते अचानक से सुनकर चुप सा रह गया। मैं उससे क्या कहता, क्यों नही की शादी, क्या वजह बताता, जब कोई वजह है ही नही। कैसे समझाता मैं उसे कि कोई वजह ना होते हुए भी मैने शादी ना करने का फैसला क्यों कर लिया। कुछ 'क्यों' के जवाब होते ही नही हैं और होते भी हैं तो वो सुनने वाले को संतुष्ट नही कर पाते। मगर मुझे कुछ तो कहना ही था तो मैने कहा, "सच्ची बताऊँ बेटा, मैने शादी इसलिए नही की क्योंकि मैं चाहता था मेरा प्यारा सा एक विक्की हो जिससे मैं खूब सारा प्यार करूँ और हम दोनो के बीच में कोई भी ना आए, मेरा छोटा सा विक्की सिर्फ मेरा हो।"
"यह तो कोई बात नही हुई, सारे बच्चो की मम्मी होती हैं, सब लोगो की wife भी होती है।"
"यह कैसी बड़ो वाली बाते कर रहा है तू, चल सो जा, सुबह जब दिल्ली पहुँच जाएगे तब ही उठना।"
मैने सोचा था उसे चुप नही कराऊँगा लेकिन उसकी बाते सुनकर मुझे बहुत अजीब लगने लगा इसलिए बेख्याली में मैने उसे डाँट दिया। मैं भी क्या करता, मैने ऐसी बातो के जवाब कभी किसी को नही दिए थे, पर मुझे यह भी पता था कि यह सवाल दोबारा मेरे सामने आएँगे।
सुबह हो गई, दिल्ली आने वाला था, हम लोग चाय पी रहे थे। चाय पीते-पीते विक्रांत बोला, "मैने दादी से पूछा था कि मम्मी क्यों नही हैं, उन्होने ही बताया कि आपने शादी नही की इसलिए नही हैं।"
"अरे बेटा, तुम फिर शूरू हो गए, और तुम्हे किसी और से कुछ भी पूछने की ज़रूरत नही है, समझे?"
"तो आप ही बताओ, क्यों नही की आपने शादी?"
"अभी चुप जाओ, इस बारे में ट्रेन में बात ना करो, Hotel पहुँच कर बताऊँगा, ठीक?"
"ठीक।"
मैने उसको फिर से चुप करा दिया था। चुप तो करा दिया लेकिन कब तक के लिए। मैं बस यही सोच रहा था कि Hotel पहुँचकर यह सवाल वो फिर से पूछेगा, मैं किस तरह उसे समझाऊँगा। मैने कभी खुद ही इस बारे में ढंग से नही सोचा, जो करना था बस वो कर दिया।
Hotel पहुँच कर मैने विक्की को कमरे में बिठाया और बाहर आकर मम्मी को गुस्से में Phone किया। मैने मम्मी से पूछा कि उन्होने विक्की से क्या कहा है तो वो बोली, "उसने मुझसे पूछा था कि मेरी मम्मी क्यों नही हैं तो मैने कह दिया क्योंकि तुम्हारे पापा ने शादी नही करी इसलिए। अब इसमे मैने गलत क्या बोला, सच ही तो कहा, तुम क्या चाहते हो मैं क्या कहूँ?"
उनकी बात सुनकर मुझे भी लगा कि यह सही तो कह रही हैं, सच ही तो कहा इन्होने विक्की से। मुझे भी उसे चुप नही कराना चाहिए, सच बोलना चाहिए, उसे समझाना चाहिए। मैं वापस कमरे में पहुँचा, विक्की एक धमाका लिए मेरा इंतज़ार कर रहा था, वो बोला, "पापा मैने Google से भी पूछा था कि 'what problem not marry?' तो उसने एक चीज़ बताई eractal dusfinction, यह क्या होता है, क्या आपने भी इस वजह से नही की?"
उसके मुँह से erectile dysfunction जैसा word सुनकर मेरा दिल धक से हो गया। मैने सोचा उसे डाँट दूँ पर अगले ही पल लगा कि नही डाँटना नही है, समझाना है। मैने कहा, "बेटा Google पर सब कुछ सही नही होता, हर चीज़ Google से नही पूछते। मैं बताता हूँ मैने शादी क्यों नही की। देखो बेटा, कुछ चीज़े हैं जो हमेशा से होती आयी हैं, मेै यह नही कहता कि वो गलत हैं, वो सही हैं बिल्कुल सही हैं पर अगर एक इंसान वो ना करना चाहे, उसका मन ना हो करने का तो लोग उसे गलत समझते हैं, उसका मज़ाक बनाते हैं। बस मेरे साथ यही है कि यह हमेशा से होती आयी चीज़ यानि शादी को मेरा करने का कभी मन नही हुआ इसलिए मैने नही की, इसीलिए कुछ लोग मुझे गलत भी समझते होंगे, मज़ाक भी बनाते होंगे पर मुझे किसी से क्या मतलब, मुझे तो बस अपने विक्की से मतलब है।"
मैने इतना बोला तो मुझे लगा कि विक्की समझ गया होगा पर उसकी सूई एक जगह अटक गई थी। वो बोला, "पर ना करने की वजह क्या है?"
ऐसा लगा जैसे उसने मेरी कोई बात सुनी ही नही, मेरे कुछ भी कहने का कोई फायदा नही हुआ। समझ नही आ रहा था कि मैं उसे और किस तरह से समझाऊँ, क्योंकि सच सुनकर तो वो राज़ी नही था, उसे तो बस वजह जाननी थी, पर वजह जब है ही नही तो मैं क्या बताऊँ।
मैने इस बात को कुछ वक्त के लिए टालते हुए उससे नहा धोकर कपड़े बदलने को कहा। वो तैयार हो गया और फिर मैं भी तैयार हुआ। हम दोनो बाहर घूमने निकले, सबसे पहले हम लोग हुमायूँ का मकबरा देखने गए। वहाँ पहुँचे और बात होने लगी। मैने उसे समझाना शुरू किया, "बेटा तुम ऐसा ना समझो कि सबकी शादी होती है, सबकी नही होती है। यह तो किस्मत की बात है बेटा, भगवान जी जिसकी चाहते हैं शादी करवा देते हैं जिसकी नही चाहते नही कराते। वजह अलग-अलग हो सकती है पर शादी होने या ना होने का फैसला तो ऊपर वाले का ही होता है।"
"पर मैने तो जितते भी बड़े लोग देखे सबकी शादी हो चुकी है।"
"हाँ बेटा हो चुकी है, पर तुम ज़्यादा लोगो से मिले ही कहाँ हो। बहुत से ऐसे लोग हैं जिनकी नही..."
मैं बात पूरी कर पाता उससे पहले ही किसी ने मेरा नाम पुकारा, "ध्रुव"
मैंने मुड़कर देखा। मुझे 2-3 Seconds लगे उसे पहचानने में, वो अमर था। हम दोनो एक दूसरे की तरफ बड़े, अमर के साथ कोई और लड़का भी था, वो मेरे पास पहुँचकर बोला, "अरे ध्रुव, पहचाना?"
"हाँ यार पहचान लिया, अमर, कैसे हो?"
"मैं मस्त हूँ तुम बताओ?"
"मैं भी बड़िया, और यह तुम्हारे भाई हैं?"
"हाँ भाई ही समझो, सिकन्दर नाम हैं, यहीं रहते हैं, दिल्ली में। मैं तो इनके पास New Year मनाने आया हूँ, तुम बताओ, यह बेटा है तुम्हारा? यार शादी कर ली तुमने बुलाया भी नही।"
"हाँ बेटा तो है पर नही शादी नही की है, गोद लिया है।"
"ओह! अच्छा। बड़े चालाक निकले तुम तो...वैेसे बहुत Cute बच्चा है, नाम क्या है?"
मेरे बोलने से पहले ही विक्की बोल पड़ा, "My name is Vikrant, पापा मुझे विक्की बुलाते हैं, और Uncle आपकी शादी हो गई है?"
मैं एक दम से विक्की को देखने लगा, कुछ कह पाता उससे पहले ही अमर हँसते हुए बोला, "नही विक्की, अभी तो नही पर मार्च में है अगले साल। तुम भी आना पापा के साथ, 21 मार्च Date है, O.K."
"देखा पापा Uncle भी शादी कर रहे हैं।"
मैने उसे आँखे दिखाते हुए कहा, "विक्की, चुप खड़े रहो, पापा को Uncle से बात करने दो।"
वो चुप हो गया, मैने अमर से पूछा, "और बताओ तुम्हारे दोस्त वीर का क्या हाल है?"
"हाँ वो है तो सही पर बेचारा Gamophobia से पूरी तरह बाहर नही निकल पाया है, अब तो घर वालो को भी बता दिया है उसने क्योंकि घर वाले बार-बार शादी का कह रहे थे।"
"अरे बेचारा, Well क्या ही कह सकते हैं यार। सीमा ने सही नही किया था, ना उसके साथ ना मेरे साथ।"
"तुम्हारे साथ उसने क्या किया?"
"उसे नही पता था कि मैं सबके blog पढ़ा करता था, उसका भी पढ़ा था मैने जिसमे उसने ऐसा कुछ लिखा था कि लड़कियों को तो Proposal मिलते ही रहते हैं उन्ही में से एक मेरे पास pending पड़ा था तो वो मैने Accept कर लिया, अब यार तुम ही बताओ कौन लड़का किसी लड़की का option बन कर रहना चाहेगा। even though बाद में उसने मुझे छोड़ा नही पर वो Blog पढ़ने के बाद मेरा मन खराब हो चुका था इसीलिए 4th Semester खत्म होते ही मैने Breakup कर लिया था।"
"हाँ, समझ सकता हूँ यार।"
"जो होता है अच्छे के लिए ही होता है, मुझे वैसे भी कभी शादी करनी नही थी, फालतू में आगे मामला फँसता। अच्छा हुआ पहले ही खत्म हो गया और शायद इस तरह उसे वीर का साथ ना देने की सज़ा भी मिल गई।"
"वो तो ऊपर वाला ही जाने। खैर यह बताओ रवि का पता चला तुम्हे या नही?"
"रवि का क्या?"
"नही पता? अरे उसकी शादी थी 5 दिसम्बर को, शादी वाले दिन ही बेचारे की Accident में death हो गई। अकेली औलाद था, उसके माँ-बाप पर क्या गुज़र रही होगी।"
"यार मुझे तो पता ही नही चला, मेरी ज़्यादा किसी से बात ही नही होती है, पहले Whatsapp Group था उससे तब भी थोड़ा पता चल जाता था। बहुत बुरा हुआ यार, पता नही भगवान किस हिसाब से लोगो को अपने पास बुला लेता है।"
"मैं भी यही सोच रहा था यार कि भगवान ने जाने हम लोगो के लिए क्या ही लिख रखा है। अपने Class वालो को देखो, कोई शादी करना चाहता है तो उसे Gamophobia है, जिसकी हो सकती है वो करना नही चाहता, एक की हो रही थी तो शादी वाले दिन मर गया, ना जाने मेरा क्या होगा। और वो मार्टिन बेचारा पिछले 5 साल से कोमा में है, ऐसे लोगो को देखो तो लगता है कि यार पता नही ऊपर वाले ने क्या ही किस्मत लिखी है।"
"यह कुछ भी हमारे हाथ में नही है, जिसने लिखा है वही जाने। खैर, अरे! तुम्हारे दोस्त सिकन्दर bore हो रहे होंगे हम लोगो की बातो से, हम लोग भी किन बातो में लग गए।"
यह सुनकर सिकन्दर बोला, "नही नही, कोई बात नही मैं समझता हूँ, कोई पुराना दोस्त मिल जाए तो यही होता है यार, और हम लोगो की तो बात होती ही रहती है।"
अमर ने उसकी बात से इत्तेफाक रखते हुए कहा, "हाँ यार, College के बाद से आज मिले हो, तुम तो alumini meet में भी नही आए थे।"
"Shop और उसके बाद विक्की, बस इसी में Busy था।"
"चलो फिर कभी एक Reunion plan करेंगे, तब ज़रूर आना।"
"ज़रूर।"
हम लोगो ने 2-4 मिनट और बात करी, इन बातो में आपका, मारिया का, आबिद का और शिराज़ का ज़िक्र आया। विक्की भी Bore होकर आगे चलने के लिए कहने लगा। मुझे उसकी ज़िद से अपना बचपन याद आ गया, जब पापा अपने दोस्तो से बात करते थे और मैं Bore होकर उनसे ऐसे ही चलने की ज़िद करता था। उस वक्त मैने भी अपने पापा की ही तरह अपने बच्चे की बात सुनी और अमर को Bye बोल दिया।
हम लोग टहलने लगे, मुझे अमर से मिलकर काफी अच्छा लगा था लेकिन विक्की फिर से शादी की बात करने लगा। मुझे भी एक point मिल गया था उसे समझाने के लिए तो मैंने कहा, "हाँ तो मैं तुम्हे क्या समझा रहा था कि शादी सबकी नही होती है, यह बस किस्मत की बात है, जैसे मेरा एक classmate था वीर और एक Teacher मोहित सर, उन्हे शादी का Phobia यानि कि डर था, वो नही कर पाए और अभी तुमने सुना रवि की शादी वाले दिन मौत हो गई, अब बताओ यह लोग तो चाह कर भी नही कर पाए यह किस्मत नही तो क्या है।"
"हाँ यह किस्मत है पर उन्होने कोशिश तो की, बिना कोशिश के किस्मत कह देना सही नही है।"
"अरे बाप रे! तू यह ऐसी बड़ी-बड़ी बाते कैसे कर रहा है, ऐसा लग रहा है कोई और ही बोल रहा है यह, तू नही।"
"बात मत टालो आप।"
"मेरी मर्ज़ी मेरी किस्मत नही हो सकती क्या? वीर और मोहित सर का वो phobia भी उनके दिमाग़ में है और मेरा यह decision भी मेरे दिमाग़ में है, तो उनका phobia किस्मत है और मेरा decision नही?"
"अब इतना तो मुझे नही पता पर decision बदले जा सकते हैं।"
"हाँ तो डरो से भी लड़ा जा सकता है।"
"वो अपने डरो से क्यों नही लड़े यह मुझे क्या पता, पर आप अपना Decision क्यों नही बदल रहे? यह मुझे जानना है।"
"तुम्हे Ice cream और Chocolates पसंद है लेकिन दाल-चावल नही, तो क्या तुम अपनी यह choice बदल सकते हो? अपनी पसंद-नापसंद बदल सकते हो?"
"हाँ अगर आप कहो तो बदल लूँगा, खास तौर पर जब आप मुझे बताएँगे कि कोई चीज़ मेरे लिए फायदेमंद है।"
"पर बेटा शादी दाल-चावल नही है।"
"example तो आप ही ने दिया।"
"अच्छा यह छोड़ो, चलो लालकिला चलते हैं अब।"
मैने बात फिर से टाल दी थी। ऐसा मैं सिर्फ इसलिए कर रहा था क़्योंकि मुझे यह बाते Uncomfortable कर रहीं थी।हम लोग वहाँ से निकल कर लालकिला गए। मैंने लालकिला पहले भी देखा था पर कभी अंदर नही गया था। हम लोग अंदर गए और एक Museum में जाकर मुग़लो के ज़माने की चीज़े देखने लगे। विक्की ने वहाँ जाकर शादी के बारे में कोई बात नही की तो मैने राहत की साँस ली कि चलो अब शायद यह भूल गया है।
पूरे दिन हम लोग ऐसे ही घूमते रहे और फिर शाम में India Gate गए क्योंकि वो New Year Eve थी। हम लोग एक तरफ आराम से बैठ गए, उस समय वहाँ काफी भीड़ थी। विक्की ने एक ओर इशारा करते हुए कहा, "वो देखो पापा, कितनी अच्ची Family लग रही है, काश हम लोगो की भी ऐसी Family होती।"
"हाँ, बहुत खूबसूरत परिवार है पर बेटा ज़रूरी नही है कि शादी हो तो ऐसा ही परिवार रहेगा। मैं ऐसे लोगो को भी जानता हूँ जिनकी बीवी की death हो गई तो उनका परिवार हमारे जैसा ही है। और बेटा परिवार तो कितना भी बड़ा या छोटा हो सकता है, मेरे लिए तो मेरा पूरा परिवार तुम ही हो। तुम मुझे अपनी Family नही समझते क्या?"
"नही ऐसा नही है, पर लोगो के साथ जो हुआ वो उनकी किस्मत थी पर आप अपने आप ही कुछ ना कर के उसे किस्मत का नाम दे रहे हैं।"
"बेटा मैं और नही समझा सकता तुमको, बस यह समझ लो कि मुझे शादी नही करनी थी और ना मैं करूँगा, अब इसे जो चाहो समझ लो, और आज के बाद इस बारे में मुझसे बात ना करना।"
"तो आप मुझे वजह बता दो, फिर नही करूँगा बात।"
"मैं बता चुका हूँ कोई वजह नही है, मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगा?"
"मैने आपको बताया नही पर रोहन चाचा दादा-दादी से कह रहे थे कि आप शायद Gay हो, इसलिए शादी नही कर रहे। मैने Gay का मतलब भी देखा था Net पर।"
"विक्रांत, तुम्हे इन बातो पर घ्यान देने की ज़रूरत नही है, और मैं Gay नही हूँ। आज के बाद तुम लोगो की बाते सुनकर Net पर कुछ search नही करोगे, समझे? लोग जो बोलते हैं बोलने दो, बस इतना याद रखो मैं तुमसे सच बोल रहा हूँ।"
उसकी बाते मुझे Anxiety दे रही थी, मैं समझ नही पा रहा था कि इन हालात में उससे क्या कहूँ, कैसे समझाऊँ। क्या एक इंसान बिना किसी वजह के शादी ना करने का फैसला नही कर सकता ? क्या यह बात इतनी अजीब है ? क्या मैने कुछ नामुमकिन काम कर लिया है? गलती विक्की की भी नही है, जब आज तक मेरे अपने माँ-बाप मेरे फैसले को नही समझ पाए तो एक छोटा बच्चा क्या समझेगा। मम्मी पापा की बातो का तो मेैने सही से जवाब भी नही दिया कभी, जो चाहा कर लिया बस, उनको बहू देने के लिए तो बड़े भैय्या थे पर विक्की तो माँ माँग रहा है इसका क्या करूँ?
2019 खत्म होने वाला था और 2020 दस्तक देने वाला था, यह वो समय था जब मुझे आपका ख्याल आया कि काश आपसे बात कर पाता तो आप ज़रूर कुछ हल बताते। हल नही तो कम से कम कुछ ऐसा समझा तो देते जिससे मन हल्का हो जाता। ना जाने आपने कैसे इतना वक्त बिना शादी के और लोगो के ताने सुनते गुज़ारा होगा, I am really Sorry मैने आज से पहले आपसे कभी यह नही पूछा। आज पूछना चाहता हूँ पर आप ना जाने कहाँ चले गए हैं।
सच कहूँ तो उस वक्त तो मन कर रहा था कि कोई ना कोई झूठी वजह बता ही दूँ, जैसे मैं Gay हूँ या erectile dysfunction है या किसी से प्यार था वो नही मिली इसलिए नही कर रहा। यही तो सुनना चाहता है ना विक्की और हर वो इंसान जिसको जानना है कि मैने शादी क्यों नही की क्योंकि बिना वजह शादी ना करना मुमकिन ही नही है। लेकिन मैं झूठ क्यों बोलूँ, मैं तो वही बोलूँगा जो सच है चाहे कोई यकीन करे या ना करे। मुझे बस अपने बेटे की फिक्र है कि वो मेरे बारे में गलत ना सोचे, क्योंकि मुझे पता है कल को उसे यह भी लग सकता है कि जैसे मैने अपनी शादी नही की वैसे ही उसकी भी नही होने दूँगा। भड़काने वालो की कमी थोड़ी है, गुस्सा आ रहा है सोच-सोच कर। 
जब मैं यह Blog लिखने बैठा हूँ, विक्की मुझसे अभी तक कुछ ना कुछ पूछ रहा है। बच्चो के सवाल तो बड़ो से भी ज़्यादा Direct और खतरनाक होते हैं। फिलहाल अगर आप यह Blog पढ़ रहे हैं तो Please मुझसे Contact करिए और बताइए मैं क्या करूँ, और अपने बारे में भी बताइए कि कैसे जी आपने यह ज़िंदगी इन बेहूदा तानो के साथ और अभी आप कहाँ है, कब मिलेंगे हम लोगो से?
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ध्रुव Blog लिखकर उठा और विक्रांत के पास जाकर सो गया। लिखते-लिखते उसकी आँखे नम हो चुकी थी क्योंकि उसे इन सवालो की उम्मीद अपने बेटे से बिल्कुल नही थी। यह सवाल समाज ने भी करे थे पर ध्रुव ने वो कभी सुने नही लेकिन अब उन सवालो का स्त्रोत बदल गया था, अब ऐसा स्त्रोत था जिसके सवाल वो अनसुने नही कर सकता था। ध्रुव एक समझदार इंसान था पर शायद वो यह भूल गया था कि किस्मत में जो होता है वो मिल कर ही रहता है, चाहे कुछ भी कर लो।
4 जनवरी को वो दोनो घर वापस आ गए, ध्रुव रोज़ Blog Check कर रहा था कि शायद मोहित सर ने Blog देखा हो और Comment किया हो, पर ऐसा कुछ नही हुआ। एक महीना ऐसे ही गुज़र गया, एक दिन एक Comment आया, लेकिन वो मोहित का नही था। ध्रुव ने उम्मीद छोड़ ही दी थी फिर फरवरी के दूसरे हफ्ते में जब उसने एक दिन Blog खोला तो 8 फरवरी का एक लम्बा-चौड़ा comment पड़ा था, "कैसे इंसान हो यार तुम, मेरे पास कई Students के Mail आये पर मैने किसी को कोई response नही दिया, मैं किसी से कोई बात नही करना चाहता था पर तुमने ऐसा पैतरा आज़माया कि मैं मजबूर हो गया। मैने कभी नही सोचा था कि मेरा बनवाया गया Blog मेरे लिए ऐसे इस्तेमाल होगा। और यार कम से कम अपना phone number तो दे देते कि मैं Call/message कर लेता।
खैर, अब क्या बताऊँ क्या हुआ और मैं कहाँ चला गया। दरअसल, मैं जब वहाँ था तो मुझे लोगो के ताने और मज़ाक सुनने को मिलते रहते थे कि शादी क्यों नही करते? यह परेशानी है या वो परेशानी है, क्या बात है? कुछ करीबी लोगो को मैने बताया भी कि मुझे Gamophobia है और मैं इलाज नही करा पाया इसलिए नही कर रहा हूँ। मुझे लगा था वो समझेंगे पर उनकी नज़र में यह Phobia vobia कुछ नही होता, दिमाग़ का वहम है बस, उनका कहना है कि शादी कर लो सब डर निकल जाएगा। उन लोगो को लगता था कि मैं करना ही नही चाहता हूँ इसलिए बहाना बना रहा हूँ। हमारे देश में Mental Issues को हवा समझा जाता है।
बेटा ध्रुव, मेरे पास तो वजह थी तब किसी ने नही समझा, तुम तो बिना वजह शादी नही कर रहे हो तुम्हारा कोई क्या समझेगा। यह भूल जाओ कि विक्की के सवाल कभी खत्म होंगे, तुम्हे इनके साथ ही जीना है, आदत डाल लो।
बात रही कि मैं कहाँ चला गया तो उसका जवाब यह है कि इन सारी चीज़ो की वजह से मैं काफी पहले से ही कहीं बाहर देश जाने की सोच रहा था। शायद तुम लोगो को नही पता था पर मैं एक Certified Yoga Instructor भी हूँ। जब तुम लोगो का batch pass out हुआ, उसी साल मैं भी चीन चला गया, वहाँ के हुआँगगैंग शहर में मैं योगा सिखाने लगा। मैं एक सुकून की ज़िंदगी जी रहा था मगर फिर वहाँ कोई CoronaVirus फैलने लगा, महामारी जैसा माहौल होने लगा। 23 जनवरी को यहाँ से कुछ दूर एक शहर है वुहान वहाँ Lockdown कर दिया गया तो मैं समझ गया कि वहाँ हुआ है तो होगा यहाँ भी इसलिए मैं भारत वापस आ गया। और जैसा मैने सोचा था वही हुआ, वुहान के बाद पूरे हुबे State में Lockdown हो गया। हालांकि अब तो भारत में भी 3-4 Cases हो गए हैं। चलो खैर तुम अपना Number दे देना फिर किसी दिन मिलता हूँ।" ध्रुव यह Comment पढ़ कर बहुत खुश हो गया। उसने फौरन G-mail खोला और मोहित को अपना Number Mail कर दिया।
ध्रुव को अपने मोहित सर तो मिल गए थे लेकिन उन्होने जो बताया उसको सोचकर वो थोड़ा परेशान था। वो इसी सोच में डूब गया कि यह ज़िंदगी ऐसे-कैसे कटेगी? क्या इस मसले का सच में कोई हल नही है?

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