मेरा परिचय मेरा नाम या वंश नहीं बस इतना है कि मैं पैसे लेकर लोगों को
जीवन से मुक्त करता हूं। वैसे तो मैं कोई अच्छा इंसान नहीं, और ना ही कभी
बनने की कोशिश करता हूं लेकिन घटना ने मुझे अन्दर तक हिला कर रख दिया। अब
आप कहेंगे कि लोगों को मारते हो तो ऐसा तो होगा ही, तो मै आपको बता दूं कि
मुझे कभी किसी की जान पैसों के बदले लेना गलत नहीं लगा और वैसे भी जिन
लोगों को मैं मारता हूं उन्होंने किसी का कुछ गलत किया ही होगा तभी तो कोई
उन्हें मारने के पैसे देता है, वरना आज के समय में जब इंसान पैसों के लिए
ही ज़िंदा है तो किसी पर यूं बर्बाद क्यों करेगा।
मैं हमेशा से ऐसा नहीं था, मेरी भी वही सोच थी जो अभी आपकी होगी। मैं एक पढ़ा लिखा नवयुवक था, आत्मविश्वास से भरपूर और भविष्य में अपने माता पिता को अपने ऊपर गर्व करवाना मेरा लक्ष्य था। मुझे नहीं पता था कि मेरे हाथो में रोजगार की रेखा नहीं है, मुझे उस कारण अवसाद का शिकार भी होना पड़ा लेकिन मेरी ज़िन्दगी तब बदली जब एक दुर्घटना मे मेरे माता पिता मुझे अकेला छोड़ गए, एक अमीरजादा उन्हें कुचल कर चला गया और इस समाज ने उनको न्याय दिलाना ज़रूरी नहीं समझा क्योकि सबके मुंह और आंखो पर पैसों की पट्टी बांध दी गई थी। वो लड़का शहर छोड़ कर चला गया। मै बदला तक नहीं ले पाया।
पैसा किसी की जान से बढ़कर था यह उस दिन मुझे समझ आ गया इसलिए मैंने पैसा लेकर लोगों की जान लेना अपना रोजगार बना लिया। मैंने कितने लोगों की जान ली मुझे नहीं पता और कितने पैसे कमाए यह भी नहीं पता बस इतना पता है कि इस धंधे में कभी मंदी नहीं आयी और मुझे पैसा कभी कम नहीं पड़ा।
एक दिन मेरे पास एक कॉल आयी, उसने अपना नाम शांतनु बताया और कहा कि एक आदमी को मारना है उसका फोटो वो वॉट्सएप पर भेज देगा और सारी जानकारी भी, फिर उसने मेरी बैंक डिटेल्स ली और फोन रखते रखते ये कहा कि मार तो तुम इसे बिना पैसों के भी दोगे लेकिन मुझे बिना पैसा दिए काम कराना अच्छा नहीं लगेगा। मैं उसकी यह बात समझ नहीं पा रहा था तभी उसने पैसा और फोटो भेज दिया और सब कुछ साफ हो गया। मैं हैरान भी था और खुश भी, खुश इसलिए क्योंकि वो फोटो उसी अमीरजादे का था और हैरान इसलिए क्योंकि लोग काम होने के बाद पैसा देते हैं, इस बंदे ने पहले दिया, और वो भी पूरा एक करोड़, मुझे लगा शायद ज़्यादा ही अमीर इंसान है और बड़ी दुश्मनी होगी तो चाह रहा होगा काम जल्दी हो। मुझे उस इंसान से क्या कोई भी हो, मतलब तो सिर्फ इस कमीने से है जिसे अब मारना है। पैसा कमाने की खुशी तो हमेशा हुई लेकिन आज इस बात की खुशी हो रही थी कि वह कौन सी घड़ी थी जब मैंने यह काम करने का सोचा, आज इस काम की वजह से ही मैं अपनी मां बाप की मौत का बदला ले पाऊंगा और शायद सुकून से मर पाऊंगा।
अगली सुबह मैंने उसे कॉल करी, उसने रिसीव करते ही कहा, "यह तुम्हारी आखरी कॉल है मुझे, आज के बाद ना करना, तुम्हारे पास उसकी सारी जानकारी है अब इसलिए मुझसे बात करने की और कुछ भी बताने समझाने कि जरूरत नहीं है मैंने पैसे दे दिए हैं, तुम उसे किसी भी वक़्त मारो मुझे नहीं मतलब बस मारो जितना जल्दी हो सके, मुझे कोई फोटो वीडियो नहीं चाहिए सबूत के तौर पर। मुझे पता चल जाएगा जब वो मरेगा, मेरी नजर तुम पर ही है।" इतना कह कर उसने फोन रख दिया मै एक अल्फ़ाज़ भी नहीं बोल पाया लेकिन मुझे सारे सवालों के जवाब मिल गए थे। पर एकबार फिर उस इंसान ने मुझे हैरान कर दिया कि इसे काम का सबूत भी नहीं चाहिए। हद है।
रात होते ही मै अपना काम करने निकला, मै उस शख्स के घर ही जा रहा था कि वो रास्ते में एक ट्रैफिक सिग्नल पर नजर आया, मैंने गाड़ी घुमाई और उसका पीछा किया। मै उसको कुचल देना चाहता था जैसे उसने मेरे मां बाप को कुचला था लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सकता था इसलिए मैं उसका पीछा करता रहा, वो एक घर के पास रुका और दरवाज़े का ताला खोल कर अन्दर गया, ये देख कर मुझे इतना समझ आ गया कि घर में और तो कोई नहीं है, वो दरवाज़ा बंद करे बिना ही अन्दर चला गया मैं उसके पीछे गया। मैंने अन्दर जाते ही पीछे से पहले उसका मुंह बंद किया और ज़हर से भरा इंजेक्शन उसकी गर्दन पर मार दिया। मेरे छोड़ने से वो ज़मीन पर गिर पड़ा। वो मेरी आंखो के सामने छटपटा रहा था और मुझे देख रहा था, मैं बहुत खुश था उसको ऐसे देखकर। मैंने उससे कहा कि "जिस पैसे की वजह से तुम बचे थे उस पैसे ने ही तुम्हारी जान ली है, किसी ने मुझे पैसे दिए तुम्हे मारने के लिए, मुझे तुम्हे मारने की तो खुशी है और इस बात की तो और ज़्यादा है कि तुम पैसे की ही वजह से मर रहे हो।" वो मरने से पहले बोला, "मैंने तुम्हारे मां बाप को नहीं मारा था वह एक दुर्घटना थी शायद इसलिए मैं बच भी गया था लेकिन तुम मुझे मार रहे हो तो तुम नहीं बचोगे।" मै उसकी लाश को वहीं छोड़ कर घर लौट आया लेकिन मुझे नहीं पता था कि अगली सुबह सब बदलने वाला था।
अगली सुबह मेरी आंख किसी के दरवाज़ा खटखटाने से खुली मैंने दरवाज़ा खोला तो पुलिस खड़ी थी। मैंने आने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि किसी का मर्डर हुआ है और मुझसे तहकीकात करनी है, मैंने नाम पूछा तो उन्होंने बताया शांतनु बावेजा। मै चौक गया कि उसको भी किसी ने मार दिया लेकिन जब मैंने कहा कि मैं तो नहीं जानता ऐसे किसी आदमी को तो उनका जवाब सुनकर मुझे उनके साथ मजबूरन जाना पड़ा। उन्होंने कहा, "तुम नहीं जानते तो उसने आखरी बार तुमसे बात क्यों की थी और उससे बड़ी बात, कल उसने तुम्हारे अकाउंट में एक करोड़ रुपए भी भेजे थे, उसके बारे में क्या कहोगे?"
उसके बाद वो मुझे साथ ले गए और मै कुछ कह नहीं पाया। पुलिस स्टेशन जाकर उन्होंने और बहुत कुछ पूछा मैं बताता गया, मैंने कहा कि "मुझे एक बिज़नेस शुरू करना था इसलिए मैंने वो पैसे उधार लिए थे क्योंकि इतना बड़ा लोन बैंक से मिलना मुश्किल था, मैं वो एक करोड़ रूपए एक निश्चित समय बाद वापस करने वाला था।" तो उनका आरोप था कि यह तो बहुत बड़ी वजह है मारने की, पैसा ही तो फसाद की जड़ है, तुमने उसे मारा क्योंकि अब तुम्हे पैसे वापस नहीं करने पड़ेंगे। इस पर मैंने कहा कि, "इतना पागल तो कोई भी नहीं होगा कि पैसा मिलने के अगले दिन ही मार दे, मैं मारता भी तो जब पैसा देने का समय आता तब मारता, अगर मारता, लेकिन मैंने नहीं मारा।" फिर अच्छी खासी बहस के बाद मैंने उसकी लाश देखने को कहा तो उन्होंने थोड़ी आनाकानी करी, तो आखिरकार उन्होंने मेरे यह कहने पर लाश दिखाई कि,"मुझ पर अभी कोई आरोप सिद्घ नही हुए हैं तो आप मुझे इस तरह से लाश दिखाने के लिए मना नहीं कर सकते क्योंकि मैं उस आदमी को जानता था तो मेरा हक बनता है उसकी लाश देखना।"
पोस्मार्टम हाउस में सैकड़ों लाशे थी, वहां काम करने वाले से जब शांतनु बावेजा की लाश दिखाने को कहा तो उसने धोके से उस कमीने की लाश निकाल दी, उसे देखकर मेरा दिमाग और खराब हो गया। मै चिल्ला पड़ा कि शांतनु बावेजा की लाश निकालो शांतनु बावेजा की, तो पुलिस वाला बोला अबे अंधा है क्या शांतनु की नहीं तो क्या तेरी लाश है। तू जानता है फिर भी पहचान नहीं पा रहा है? तो मैंने कहा जहां तक मुझे मालूम है इस आदमी का नाम शानू है शांतनु नही और यह एक अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था। तो पुलिसवाला बोला, "अरे घनचक्कर, शाहरुख खान को एसआरके बोले तो कोई और बन जाता है वो, जो शांतनु को शानू बोलने से कोई और हो जाएगा, अरे शानू तो वो क्या बोलते हैं निक नेम था असल नाम तो शांतनु ही था।" इतना सुनना था कि मै बहुत तेज़ हंसने लगा, हंसते हंसते ज़मीन पर बैठ गया। मेरे दिमाग़ ने मेरा साथ छोड़ दिया लेकिन फिर भी स्तिथि समझने की कोशिश कर रहा था, कि यह हुआ क्या? समझने को हजार चीज़े थी कि इतना पैसा होते हुए वो मरना क्यों चाहता था, उसने खुद को क्यों मरवाया कोई बात थी तो खुद आत्महत्या क्यों नहीं कर ली, मुझे ही क्यूं चुना,...आदि, लेकिन बस एक बात बिल्कुल स्पष्ट थी जिसके बाद किसी जवाब की ज़रूरत नहीं थी और वह यह कि जिसके कारण मेरे पापो का आरंभ हुआ था वो खुद पूर्णविराम भी बन गया। "क्यों बन गया ?" इसका उत्तर तो उसी के साथ चला गया तो मैं आपको क्या बताऊं।
मैं हमेशा से ऐसा नहीं था, मेरी भी वही सोच थी जो अभी आपकी होगी। मैं एक पढ़ा लिखा नवयुवक था, आत्मविश्वास से भरपूर और भविष्य में अपने माता पिता को अपने ऊपर गर्व करवाना मेरा लक्ष्य था। मुझे नहीं पता था कि मेरे हाथो में रोजगार की रेखा नहीं है, मुझे उस कारण अवसाद का शिकार भी होना पड़ा लेकिन मेरी ज़िन्दगी तब बदली जब एक दुर्घटना मे मेरे माता पिता मुझे अकेला छोड़ गए, एक अमीरजादा उन्हें कुचल कर चला गया और इस समाज ने उनको न्याय दिलाना ज़रूरी नहीं समझा क्योकि सबके मुंह और आंखो पर पैसों की पट्टी बांध दी गई थी। वो लड़का शहर छोड़ कर चला गया। मै बदला तक नहीं ले पाया।
पैसा किसी की जान से बढ़कर था यह उस दिन मुझे समझ आ गया इसलिए मैंने पैसा लेकर लोगों की जान लेना अपना रोजगार बना लिया। मैंने कितने लोगों की जान ली मुझे नहीं पता और कितने पैसे कमाए यह भी नहीं पता बस इतना पता है कि इस धंधे में कभी मंदी नहीं आयी और मुझे पैसा कभी कम नहीं पड़ा।
एक दिन मेरे पास एक कॉल आयी, उसने अपना नाम शांतनु बताया और कहा कि एक आदमी को मारना है उसका फोटो वो वॉट्सएप पर भेज देगा और सारी जानकारी भी, फिर उसने मेरी बैंक डिटेल्स ली और फोन रखते रखते ये कहा कि मार तो तुम इसे बिना पैसों के भी दोगे लेकिन मुझे बिना पैसा दिए काम कराना अच्छा नहीं लगेगा। मैं उसकी यह बात समझ नहीं पा रहा था तभी उसने पैसा और फोटो भेज दिया और सब कुछ साफ हो गया। मैं हैरान भी था और खुश भी, खुश इसलिए क्योंकि वो फोटो उसी अमीरजादे का था और हैरान इसलिए क्योंकि लोग काम होने के बाद पैसा देते हैं, इस बंदे ने पहले दिया, और वो भी पूरा एक करोड़, मुझे लगा शायद ज़्यादा ही अमीर इंसान है और बड़ी दुश्मनी होगी तो चाह रहा होगा काम जल्दी हो। मुझे उस इंसान से क्या कोई भी हो, मतलब तो सिर्फ इस कमीने से है जिसे अब मारना है। पैसा कमाने की खुशी तो हमेशा हुई लेकिन आज इस बात की खुशी हो रही थी कि वह कौन सी घड़ी थी जब मैंने यह काम करने का सोचा, आज इस काम की वजह से ही मैं अपनी मां बाप की मौत का बदला ले पाऊंगा और शायद सुकून से मर पाऊंगा।
अगली सुबह मैंने उसे कॉल करी, उसने रिसीव करते ही कहा, "यह तुम्हारी आखरी कॉल है मुझे, आज के बाद ना करना, तुम्हारे पास उसकी सारी जानकारी है अब इसलिए मुझसे बात करने की और कुछ भी बताने समझाने कि जरूरत नहीं है मैंने पैसे दे दिए हैं, तुम उसे किसी भी वक़्त मारो मुझे नहीं मतलब बस मारो जितना जल्दी हो सके, मुझे कोई फोटो वीडियो नहीं चाहिए सबूत के तौर पर। मुझे पता चल जाएगा जब वो मरेगा, मेरी नजर तुम पर ही है।" इतना कह कर उसने फोन रख दिया मै एक अल्फ़ाज़ भी नहीं बोल पाया लेकिन मुझे सारे सवालों के जवाब मिल गए थे। पर एकबार फिर उस इंसान ने मुझे हैरान कर दिया कि इसे काम का सबूत भी नहीं चाहिए। हद है।
रात होते ही मै अपना काम करने निकला, मै उस शख्स के घर ही जा रहा था कि वो रास्ते में एक ट्रैफिक सिग्नल पर नजर आया, मैंने गाड़ी घुमाई और उसका पीछा किया। मै उसको कुचल देना चाहता था जैसे उसने मेरे मां बाप को कुचला था लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सकता था इसलिए मैं उसका पीछा करता रहा, वो एक घर के पास रुका और दरवाज़े का ताला खोल कर अन्दर गया, ये देख कर मुझे इतना समझ आ गया कि घर में और तो कोई नहीं है, वो दरवाज़ा बंद करे बिना ही अन्दर चला गया मैं उसके पीछे गया। मैंने अन्दर जाते ही पीछे से पहले उसका मुंह बंद किया और ज़हर से भरा इंजेक्शन उसकी गर्दन पर मार दिया। मेरे छोड़ने से वो ज़मीन पर गिर पड़ा। वो मेरी आंखो के सामने छटपटा रहा था और मुझे देख रहा था, मैं बहुत खुश था उसको ऐसे देखकर। मैंने उससे कहा कि "जिस पैसे की वजह से तुम बचे थे उस पैसे ने ही तुम्हारी जान ली है, किसी ने मुझे पैसे दिए तुम्हे मारने के लिए, मुझे तुम्हे मारने की तो खुशी है और इस बात की तो और ज़्यादा है कि तुम पैसे की ही वजह से मर रहे हो।" वो मरने से पहले बोला, "मैंने तुम्हारे मां बाप को नहीं मारा था वह एक दुर्घटना थी शायद इसलिए मैं बच भी गया था लेकिन तुम मुझे मार रहे हो तो तुम नहीं बचोगे।" मै उसकी लाश को वहीं छोड़ कर घर लौट आया लेकिन मुझे नहीं पता था कि अगली सुबह सब बदलने वाला था।
अगली सुबह मेरी आंख किसी के दरवाज़ा खटखटाने से खुली मैंने दरवाज़ा खोला तो पुलिस खड़ी थी। मैंने आने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि किसी का मर्डर हुआ है और मुझसे तहकीकात करनी है, मैंने नाम पूछा तो उन्होंने बताया शांतनु बावेजा। मै चौक गया कि उसको भी किसी ने मार दिया लेकिन जब मैंने कहा कि मैं तो नहीं जानता ऐसे किसी आदमी को तो उनका जवाब सुनकर मुझे उनके साथ मजबूरन जाना पड़ा। उन्होंने कहा, "तुम नहीं जानते तो उसने आखरी बार तुमसे बात क्यों की थी और उससे बड़ी बात, कल उसने तुम्हारे अकाउंट में एक करोड़ रुपए भी भेजे थे, उसके बारे में क्या कहोगे?"
उसके बाद वो मुझे साथ ले गए और मै कुछ कह नहीं पाया। पुलिस स्टेशन जाकर उन्होंने और बहुत कुछ पूछा मैं बताता गया, मैंने कहा कि "मुझे एक बिज़नेस शुरू करना था इसलिए मैंने वो पैसे उधार लिए थे क्योंकि इतना बड़ा लोन बैंक से मिलना मुश्किल था, मैं वो एक करोड़ रूपए एक निश्चित समय बाद वापस करने वाला था।" तो उनका आरोप था कि यह तो बहुत बड़ी वजह है मारने की, पैसा ही तो फसाद की जड़ है, तुमने उसे मारा क्योंकि अब तुम्हे पैसे वापस नहीं करने पड़ेंगे। इस पर मैंने कहा कि, "इतना पागल तो कोई भी नहीं होगा कि पैसा मिलने के अगले दिन ही मार दे, मैं मारता भी तो जब पैसा देने का समय आता तब मारता, अगर मारता, लेकिन मैंने नहीं मारा।" फिर अच्छी खासी बहस के बाद मैंने उसकी लाश देखने को कहा तो उन्होंने थोड़ी आनाकानी करी, तो आखिरकार उन्होंने मेरे यह कहने पर लाश दिखाई कि,"मुझ पर अभी कोई आरोप सिद्घ नही हुए हैं तो आप मुझे इस तरह से लाश दिखाने के लिए मना नहीं कर सकते क्योंकि मैं उस आदमी को जानता था तो मेरा हक बनता है उसकी लाश देखना।"
पोस्मार्टम हाउस में सैकड़ों लाशे थी, वहां काम करने वाले से जब शांतनु बावेजा की लाश दिखाने को कहा तो उसने धोके से उस कमीने की लाश निकाल दी, उसे देखकर मेरा दिमाग और खराब हो गया। मै चिल्ला पड़ा कि शांतनु बावेजा की लाश निकालो शांतनु बावेजा की, तो पुलिस वाला बोला अबे अंधा है क्या शांतनु की नहीं तो क्या तेरी लाश है। तू जानता है फिर भी पहचान नहीं पा रहा है? तो मैंने कहा जहां तक मुझे मालूम है इस आदमी का नाम शानू है शांतनु नही और यह एक अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था। तो पुलिसवाला बोला, "अरे घनचक्कर, शाहरुख खान को एसआरके बोले तो कोई और बन जाता है वो, जो शांतनु को शानू बोलने से कोई और हो जाएगा, अरे शानू तो वो क्या बोलते हैं निक नेम था असल नाम तो शांतनु ही था।" इतना सुनना था कि मै बहुत तेज़ हंसने लगा, हंसते हंसते ज़मीन पर बैठ गया। मेरे दिमाग़ ने मेरा साथ छोड़ दिया लेकिन फिर भी स्तिथि समझने की कोशिश कर रहा था, कि यह हुआ क्या? समझने को हजार चीज़े थी कि इतना पैसा होते हुए वो मरना क्यों चाहता था, उसने खुद को क्यों मरवाया कोई बात थी तो खुद आत्महत्या क्यों नहीं कर ली, मुझे ही क्यूं चुना,...आदि, लेकिन बस एक बात बिल्कुल स्पष्ट थी जिसके बाद किसी जवाब की ज़रूरत नहीं थी और वह यह कि जिसके कारण मेरे पापो का आरंभ हुआ था वो खुद पूर्णविराम भी बन गया। "क्यों बन गया ?" इसका उत्तर तो उसी के साथ चला गया तो मैं आपको क्या बताऊं।
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